बदलती तकनीक अब सिर्फ फिल्मों के विजुअल इफेक्ट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि इतिहास और यादों को भी नए अंदाज में जीवंत कर रही है। बिहार के वरिष्ठ पत्रकार और फिल्मकार दिनेश आनंद ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बायोपिक ‘द सेंचुरी मैन’ बनाई है, जो इन दिनों सोशल मीडिया और यूट्यूब पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
करीब 50 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री शैली की फिल्म को 26 जून को दिनेश आनंद के आधिकारिक यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज पर रिलीज किया गया। फिल्मकार का दावा है कि अब तक इसे लगभग 3 लाख लोग देख चुके हैं। इसका विशेष प्रदर्शन भागलपुर के पीरपैंती में पद्मश्री डॉ. दिलीप कुमार सिंह के 100वें जन्मदिन पर बड़े पर्दे पर भी किया गया।
फिल्म में डॉ. दिलीप कुमार सिंह के बचपन, चिकित्सा सेवा, सामाजिक कार्यों, शोध और सौ वर्षों की जीवन यात्रा को एआई तकनीक के जरिए जीवंत बनाया गया है। उन ऐतिहासिक घटनाओं और दृश्यों को भी पर्दे पर उतारा गया है, जिनकी कभी वास्तविक वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद नहीं थी।
दिनेश आनंद बताते हैं कि उन्होंने करीब नौ वर्ष पहले भी डॉ. सिंह पर फिल्म बनाई थी, लेकिन शतायु होने के अवसर पर नई तकनीक के साथ उनकी प्रेरक कहानी को दोबारा प्रस्तुत किया गया।
फिल्म में डॉ. सिंह के स्वास्थ्य सेवा में योगदान, पद्मश्री सम्मान, पोलियो उन्मूलन के प्रयास और शराब मुक्ति से जुड़ी औषधि के शोध का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही उनके परिवार के प्रतापगढ़ राजघराने, नेपाल के राणा परिवार और जयपुर राजघराने से जुड़े ऐतिहासिक रिश्तों को भी दर्शाया गया है।
करीब पांच लाख रुपये के बजट में बनी इस फिल्म के लिए हर एआई दृश्य को तैयार करने में कई बार प्रयास करना पड़ा। फिल्म देखने के बाद स्वयं डॉ. दिलीप कुमार सिंह और उनकी पत्नी रूपकुमारी सिंह ने पूरी टीम की सराहना की।
‘द सेंचुरी मैन’ सिर्फ एक बायोपिक नहीं, बल्कि इतिहास, प्रेरणा और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम है। यह फिल्म इस बात का संकेत भी देती है कि सीमित संसाधनों में भी बिहार का क्षेत्रीय सिनेमा एआई तकनीक के दम पर नई पहचान बना सकता है।







