बिहार के पश्चिम चंपारण से मानव तस्करी के खिलाफ बड़ी और अहम खबर सामने आई है। बगहा व्यवहार न्यायालय ने तीन नाबालिग बच्चियों की तस्करी के प्रयास के मामले में पश्चिम बंगाल के रहने वाले मां-बेटे को दोषी करार दिया है। अब अदालत 13 जुलाई को दोनों दोषियों की सजा पर फैसला सुनाएगी।
यह मामला बगहा के नौरंगिया थाना कांड संख्या 05/2026 से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, 22 जनवरी 2026 को एक सामाजिक संस्था की सूचना पर पुलिस और मानव तस्करी निरोधक इकाई ने संयुक्त कार्रवाई की थी। इस दौरान एक महिला और उसके बेटे को तीन नाबालिग बच्चियों के साथ संदिग्ध परिस्थितियों में पकड़ा गया। जांच में खुलासा हुआ कि बच्चियों को बहला-फुसलाकर पश्चिम बंगाल ले जाने की तैयारी थी। मौके से दो मोबाइल फोन और बगहा से आसनसोल तक के रेल टिकट भी बरामद किए गए।
पुलिस ने 15 मार्च को आरोपपत्र दाखिल किया। 15 जून को अदालत ने आरोप तय किए और 22 जून से गवाहों की गवाही शुरू हुई। मानव व्यापार निरोधक इकाई की पुलिस पदाधिकारी रेशमी समेत पांच गवाहों के बयान दर्ज किए गए। महज 24 दिनों में ट्रायल पूरा करते हुए अदालत ने 9 जुलाई को नियोती देवी और उनके बेटे नागेश भुइयां को दोषी करार दे दिया।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी और जब्ती सूची के समय में अंतर, केवल पुलिस गवाहों के बयान तथा बच्चियों के पिता की गवाही नहीं होने का मुद्दा उठाकर आरोपों पर सवाल खड़े किए। हालांकि अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी भोले-भाले थारू समुदाय के लोगों को झाड़-फूंक और टोना-टोटका का झांसा देकर मानव तस्करी के जाल में फंसाते थे। बरामद सबूत और गवाहों के बयान आरोपों की पुष्टि करते हैं।
लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने बताया कि नए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) लागू होने के बाद पूर्वी और पश्चिम चंपारण में मानव तस्करी के मामले में यह पहला दोषसिद्धि का फैसला है। अब 13 जुलाई को अदालत दोनों दोषियों की सजा तय करेगी। इस फैसले को मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों के खिलाफ त्वरित न्याय व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







