पटना के बांस घाट पर हाईटेक शवदाह गृह: अंतिम विदाई भी अब सम्मान, सुविधा और गरिमा के साथ

पटना: विकास केवल सड़क, पुल और अस्पताल तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह इस बात से भी तय होता है कि समाज अपने नागरिकों को अंतिम विदाई कितनी गरिमा के साथ देता है। इसी सोच के तहत बिहार सरकार ने ईशा फाउंडेशन के सहयोग से पटना के बांस घाट पर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हाईटेक शवदाह गृह विकसित किया है।

करीब 89.40 करोड़ रुपये की लागत से 4.5 एकड़ में बने इस आधुनिक परिसर का निर्माण बिहार सरकार ने कराया है, जबकि इसका संचालन ईशा फाउंडेशन कर रहा है। यहां शोकाकुल परिवारों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग एयर कंडीशन प्रतीक्षालय, स्वच्छ शौचालय, पेयजल, पार्किंग और व्यवस्थित प्रवेश-निकास की व्यवस्था की गई है।

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परिसर को हरियाली से विकसित किया गया है। गंगा के जलस्तर को ध्यान में रखते हुए एक तालाब भी बनाया जा रहा है, जहां अंतिम संस्कार के बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार स्नान किया जा सकेगा।

यहां लोगों को अपनी परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार का विकल्प मिलता है। इच्छुक परिवार विद्युत शवदाह गृह का उपयोग 3500 रुपये के निर्धारित शुल्क पर कर सकते हैं, जबकि पारंपरिक लकड़ी से अंतिम संस्कार की भी सुविधा उपलब्ध है। आम की लकड़ी 10 रुपये प्रति किलोग्राम और सखुआ की लकड़ी 20 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराई जा रही है।

अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे देवेंद्र कुमार भानु ने बताया कि पहले भीषण गर्मी और बारिश में घंटों खुले में इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब एसी प्रतीक्षालय और बेहतर व्यवस्था से लोगों को काफी राहत मिली है। वहीं संजीव कुमार ने कहा कि कैंटीन समेत अन्य सुविधाओं ने इस कठिन समय को पहले की तुलना में अधिक सहज बना दिया है।

ईशा फाउंडेशन के सदस्य सुनील कुमार ने इसे राजधानी के लिए एक मानवीय उपहार बताया। वहीं व्यवस्था का संचालन देख रहे राजीव मिश्रा ने कहा कि उनका उद्देश्य प्रत्येक परिवार को सम्मानजनक और सुविधाजनक अंतिम संस्कार उपलब्ध कराना है।

बांस घाट का यह हाईटेक शवदाह गृह केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासन और मानवीय सोच का प्रतीक बनकर उभरा है, जहां अंतिम विदाई भी सम्मान और गरिमा के साथ दी जा रही है।

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