भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली तत्काल राहत, फौरन सुनवाई से किया इनकार

भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में तत्काल सुनवाई की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट से याचिकाकर्ता को फिलहाल राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने मामले की फौरन सुनवाई करने से इनकार करते हुए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश दिया है।

 

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यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा 21 जून को दायर की गई थी। याचिका में भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ को कथित तौर पर फर्जी एनकाउंटर बताते हुए पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की गई है। साथ ही घटना में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने तथा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है।

 

याचिका में यह भी मांग की गई है कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में गठित स्वतंत्र जांच समिति द्वारा कराई जाए, ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके और जनता का विश्वास बना रहे।

 

सोमवार को जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया, लेकिन अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष मेंशनिंग करनी होगी और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।

 

सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद फिलहाल मामले की तत्काल सुनवाई की संभावना टल गई है। अब याचिकाकर्ता को रजिस्ट्रार के समक्ष अपनी मांग प्रस्तुत करनी होगी, जिसके बाद आगे की सुनवाई की तारीख निर्धारित की जा सकती है।

 

उल्लेखनीय है कि भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर लगातार बहस जारी है। एक ओर पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मामले की निष्पक्ष एवं न्यायिक जांच की मांग भी तेज होती जा रही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में दायर यह याचिका इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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