बिहार के बेगूसराय जिले के दुलारपुर गांव के युवा खिलाड़ी शिवा कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। बांग्लादेश में 10 से 14 जून तक आयोजित मेंस IHF ट्रॉफी में भारतीय हैंडबॉल टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा, जिसमें शिवा कुमार की अहम भूमिका रही। गोल्ड मेडल जीतकर जब शिवा अपने गृह जिले लौटे तो रेलवे स्टेशन से लेकर रिफाइनरी टाउनशिप तक उनका भव्य स्वागत किया गया। खेल प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने उन्हें फूल-मालाओं से सम्मानित किया।
रिफाइनरी टाउनशिप स्थित गेस्ट हाउस में आयोजित सम्मान समारोह में केंद्रीय मंत्री ने शिवा को मेडल पहनाकर और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराना पूरे बिहार और देश के लिए गर्व की बात है। उनका मानना है कि शिवा की सफलता बिहार के ग्रामीण युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।
शिवा कुमार ने अपनी उपलब्धि का श्रेय परिवार, गांव के लोगों और अपने कोच को दिया। उन्होंने बताया कि गांव में हैंडबॉल का अच्छा माहौल था और दूसरों को खेलता देखकर उन्होंने भी अभ्यास शुरू किया। मेहनत और लगन के दम पर वह गांव के मैदान से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे। फिलहाल शिवा गुजरात में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के तहत आधुनिक प्रशिक्षण ले रहे हैं। इससे पहले वह कुवैत में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनका अगला लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है।
शिवा ने बिहार में खेल सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर के इंडोर हैंडबॉल कोर्ट और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं की जरूरत है।
हैंडबॉल खेल के प्रमुख नियम
हैंडबॉल में प्रत्येक टीम में 7 खिलाड़ी होते हैं, जिनमें 6 मैदानी खिलाड़ी और 1 गोलकीपर शामिल होता है। मैच 30-30 मिनट के दो हाफ में खेला जाता है। खिलाड़ी गेंद को केवल हाथ, बांह, छाती, पीठ और घुटने से ऊपर के हिस्सों से छू सकते हैं, जबकि गोलकीपर को पैर इस्तेमाल करने की अनुमति होती है। कोई खिलाड़ी गेंद को अधिकतम 3 सेकंड तक पकड़ सकता है या 3 कदम चल सकता है। गोल क्षेत्र में केवल गोलकीपर प्रवेश कर सकता है और मैदानी खिलाड़ियों को बाहर से छलांग लगाकर शॉट लगाना होता है। सबसे अधिक गोल करने वाली टीम विजेता घोषित होती है।






