पिता बने ताकत, बेटे ने रचा इतिहास: मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से जूझते प्रत्यूष प्रभाकर बने SDM

मुजफ्फरपुर: फादर्स डे पर बिहार के मुजफ्फरपुर से पिता-पुत्र के अटूट विश्वास, संघर्ष और समर्पण की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। मिठनपुरा निवासी प्रत्यूष प्रभाकर ने गंभीर बीमारी मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (स्पाइनल मस्कुलर अट्रॉफी) से जूझते हुए 70वीं BPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) में जगह बनाई है। उन्होंने ओवरऑल 1098वीं रैंक हासिल की, जबकि OH श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त किया।

 

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बचपन से ही मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित प्रत्यूष के लिए चलना-फिरना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कभी अपनी शारीरिक कमजोरी को सपनों के आड़े नहीं आने दिया। घर पर रहकर नियमित सेल्फ-स्टडी और ऑनलाइन माध्यम से तैयारी करते हुए उन्होंने चौथे प्रयास में यह सफलता हासिल की।

 

प्रत्यूष अपनी इस उपलब्धि का सबसे बड़ा श्रेय अपने पिता संजय कुमार को देते हैं। उनका कहना है कि पिता हर कदम पर उनके सहायक, साथी और सबसे बड़े प्रेरणास्रोत रहे। बचपन में वे उन्हें ट्राईसाइकिल से स्कूल छोड़ते थे और परीक्षा के हर पड़ाव पर उनका हौसला बढ़ाते रहे। वहीं, पिता संजय कुमार ने बेटे की इस सफलता को फादर्स डे का सबसे अनमोल उपहार बताया।

 

प्रत्यूष की मां नीलम कुमारी, जो बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में बॉटनी की प्रोफेसर हैं, ने भी उनकी पढ़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रत्यूष की सफलता यह साबित करती है कि मजबूत इरादे, निरंतर मेहनत और परिवार का अटूट साथ हो तो हर मुश्किल मंजिल में बदल सकती है।

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