14वें और अंतिम प्रयास में मिली उड़ान: दर्जी मां और वीडियो ग्राफर पिता के बेटे दिव्यराज बने वायुसेना के फ्लाइंग ऑफिसर

नालंदा जिले के बिंद गांव के रहने वाले दिव्यराज कुमार ने यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और लगातार मेहनत के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। साधारण परिवार से आने वाले दिव्यराज ने भारतीय वायुसेना की AFCAT परीक्षा अपने 14वें और अंतिम प्रयास में पास कर फ्लाइंग ऑफिसर (लेवल-4) का पद हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे गांव और जिले में खुशी का माहौल है।

दिव्यराज बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं। उन्होंने बिहार शरीफ के रामकृष्ण विद्या मंदिर में शुरुआती शिक्षा प्राप्त की और बाद में सैनिक स्कूल कुंजपुरा, हरियाणा में चयनित हुए। वर्ष 2016 में 10वीं में 96 प्रतिशत और 2018 में 12वीं में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्यामलाल कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

स्नातक के बाद दिव्यराज ने सेना में अधिकारी बनने का सपना लेकर AFCAT, CDS और कोस्ट गार्ड जैसी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। 2021 में पहले ही प्रयास में परीक्षा पास कर ली, लेकिन मेरिट सूची में जगह नहीं बना सके। लगातार असफलताओं और इंटरव्यू में चयन न होने से कई बार निराशा हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आखिरकार 2025 में अपने 14वें और अंतिम प्रयास में AFCAT और CDS दोनों परीक्षाएं पास कर लीं। उन्होंने वायुसेना को अपनी पहली प्राथमिकता के रूप में चुना।

दिव्यराज ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि रक्षा सेवाएं केवल सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि देश सेवा का सर्वोच्च अवसर हैं। उन्होंने कहा कि असफलताओं से घबराने के बजाय लगातार खुद को बेहतर बनाने की जरूरत है। यदि अंतिम प्रयास में उन्हें सफलता मिल सकती है, तो कोई भी युवा अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है।

इस सफलता के पीछे परिवार का बड़ा संघर्ष रहा है। उनकी मां चंचला देवी गांव में सिलाई का काम करती हैं, जबकि पिता मोहन कुमार वीडियो ग्राफर हैं और बिंद बाजार में स्टूडियो चलाते हैं। पिता ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन बेटे की सफलता ने सारी मेहनत सफल कर दी। वहीं दोस्तों का कहना है कि कठिन दौर में परिवार और मित्रों के समर्थन ने ही दिव्यराज को आगे बढ़ने की ताकत दी।

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