गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज जिले के बरौली प्रखंड स्थित कहला-पीपरहियां गांव के पास सारण मुख्य नहर का तटबंध अचानक टूट जाने से बड़ा संकट खड़ा हो गया है। तटबंध टूटते ही नहर का तेज बहाव आसपास के कृषि क्षेत्रों में फैल गया, जिससे करीब 500 एकड़ में लगी फसलें जलमग्न हो गईं। इस घटना से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।
जानकारी के अनुसार, खेतों में तैयार धान के बिचड़े, सीधी बुआई वाली धान की फसल, सब्जियां और अन्य कृषि फसलें पानी में डूब गई हैं। कई स्थानों पर खेतों में कई फीट तक पानी जमा हो गया है, जिससे फसलों के सड़ने और पूरी तरह नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर और कड़ी मेहनत के बाद खेती की थी, लेकिन तटबंध टूटने से उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस घटना के लिए जल संसाधन विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि तटबंध की समय पर मरम्मत और निगरानी नहीं होने के कारण यह हादसा हुआ। घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी और विभागीय टीम मौके पर पहुंची तथा स्थिति का जायजा लिया।
फिलहाल ग्रामीणों और विभागीय कर्मियों की मदद से पानी के बहाव को नियंत्रित करने और टूटे तटबंध की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। हालांकि पानी का दबाव अभी भी चुनौती बना हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द पानी नहीं रोका गया तो आसपास के रिहायशी इलाकों में भी पानी घुस सकता है।
इधर, गंडक परियोजना के अभियंता दिलीप कुमार ने बताया कि नहर में क्षमता से अधिक पानी पहुंचने के कारण दबाव बढ़ गया, जिससे तटबंध टूट गया। उन्होंने कहा कि फिलहाल नहर में करीब एक हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है और जरूरत के अनुसार इसकी मात्रा बढ़ाई जा सकती है। तटबंध की मरम्मत के लिए आवश्यक सामग्री जुटाई जा रही है और देर रात तक टूटे हिस्से को बंद करने का प्रयास किया जाएगा।
पीड़ित किसानों ने सरकार से फसलों के नुकसान का आकलन कर जल्द मुआवजा देने की मांग की है।





