पटना: ऑनलाइन फूड डिलीवरी, ई-कॉमर्स और ऐप आधारित सेवाओं के बढ़ते विस्तार के साथ गिग वर्कर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इन्हीं कामगारों की सुविधा के लिए बिहार की राजधानी पटना में दो विशेष गिग वर्कर पॉड्स तैयार किए गए हैं। चेन्नई और कोयंबटूर के बाद पटना देश का तीसरा शहर बनने जा रहा है, जहां इस तरह की सुविधा उपलब्ध होगी।
गिग वर्कर्स वे लोग हैं जो किसी कंपनी के स्थायी कर्मचारी नहीं होते, बल्कि मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम करते हैं। इनमें फूड डिलीवरी पार्टनर, ई-कॉमर्स डिलीवरी एजेंट, कैब चालक और अन्य प्लेटफॉर्म आधारित कामगार शामिल हैं।
पटना में इनकम टैक्स गोलंबर और गांधी मैदान गेट नंबर-4 के पास तैयार किए गए इन पॉड्स में बैठने और आराम करने की व्यवस्था, शुद्ध पेयजल, मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट, इंटरनेट सुविधा, प्राथमिक उपचार किट और मौसम से बचाव के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही फायर सेफ्टी के लिए अग्निशमन उपकरण भी लगाए गए हैं।
हजारों गिग वर्कर्स को गर्मी, बारिश और ठंड में सड़क किनारे घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में ये पॉड्स उनके लिए राहत केंद्र साबित होंगे। डिलीवरी पार्टनर राजू कुमार ने कहा कि एसी में आराम, मोबाइल चार्जिंग और अन्य सुविधाओं से कामकाजी जीवन काफी आसान होगा। वहीं रमेश कुमार का कहना है कि लंच करने और कुछ समय आराम करने के लिए यह सुविधा बेहद उपयोगी साबित होगी।
देश में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा देने पर भी जोर बढ़ रहा है। सोशल सिक्योरिटी कोड-2020 में पहली बार इन्हें अलग श्रेणी के रूप में मान्यता दी गई है, जिससे भविष्य में बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि गिग वर्कर्स शहर की जीवनरेखा हैं और उनके लिए सम्मानजनक विश्राम स्थल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जून के अंत तक इन केंद्रों को शुरू करने की तैयारी चल रही है। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में बिहार के अन्य शहरों में भी ऐसे लॉन्ज विकसित किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ गिग वर्कर्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पटना की यह पहल देश के अन्य शहरों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बन सकती है।






