23 साल पुराने भूमि विवाद का अंत, अदालत के आदेश पर वादी को दिलाया गया जमीन का कब्जा
पश्चिम चंपारण के बगहा में करीब 23 साल पुराने भूमि विवाद का आखिरकार पटाक्षेप हो गया। व्यवहार न्यायालय बगहा के आदेश के बाद प्रशासन की मौजूदगी में दखल-दहानी की कार्रवाई पूरी कराते हुए वादी को जमीन का कब्जा दिलाया गया। पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
मामला बगहा व्यवहार न्यायालय में स्वत्व वाद संख्या 17/2003 से जुड़ा था। अमित बहादुर सिंह और नवल साह के बीच नौतनवा गांव स्थित 16 धुर जमीन को लेकर वर्षों से विवाद चल रहा था। लंबी सुनवाई के बाद मुंसिफ न्यायालय ने वादी अमित बहादुर सिंह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रतिवादी नवल साह को विवादित भूमि खाली करने का निर्देश दिया था।
न्यायालय के आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए अनुमंडल कार्यालय बगहा ने विशेष प्रशासनिक व्यवस्था की। अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर राजस्व अधिकारी रवि प्रकाश चौधरी को दंडाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया। वहीं न्यायालय के नाजिर परमेन्द्र कुमार के नेतृत्व में दखल-दहानी की पूरी प्रक्रिया संचालित की गई।
रविवार को सेमरा थाना क्षेत्र के नौतनवा गांव में पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारियों और दोनों पक्षों की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू हुई। प्रशासन ने न्यायालय के आदेश के अनुसार जमीन को खाली कराकर वादी अमित बहादुर सिंह को उसका कब्जा दिलाया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिससे पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण और विधिसम्मत तरीके से संपन्न हो सकी।
“व्यवहार न्यायालय के द्वारा दिए गए फैसले का अनुपालन कराने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए। दखल-दहानी की प्रक्रिया पूरी कराते हुए वादी को जमीन का कब्जा दिला दिया गया है। कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई और सबकुछ शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।” – अधिकारी
करीब 23 वर्षों तक चले इस भूमि विवाद के समाप्त होने के साथ एक लंबे कानूनी संघर्ष का अंत हो गया। प्रशासन का कहना है कि न्यायालय के आदेशों का अक्षरशः पालन कराया जाएगा और भविष्य में भी कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई जारी रहेगी। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है।