भागलपुर: बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (बीएयू) में कार्यरत दैनिक मजदूरों को पिछले पांच महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। अपनी समस्याओं और बकाया मजदूरी के भुगतान की मांग को लेकर बड़ी संख्या में मजदूर शुक्रवार को विश्वविद्यालय के कुलपति से मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपनी आर्थिक परेशानियों से कुलपति को अवगत कराया और जल्द भुगतान की मांग की।
मजदूरों ने बताया कि विश्वविद्यालय में उनकी दैनिक मजदूरी 438 रुपये निर्धारित है। हालांकि उन्हें महीने में अधिकतम 26 दिनों तक ही काम मिलता है, जिसके कारण उनकी मासिक आय मात्र 11,388 रुपये होती है। उनका कहना है कि वर्तमान महंगाई के दौर में इतनी राशि से परिवार का भरण-पोषण करना पहले से ही मुश्किल है। ऐसे में यदि लगातार पांच महीने तक वेतन नहीं मिले तो परिवार की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
मजदूरों के अनुसार, कई कर्मचारी वर्षों से विश्वविद्यालय में सेवा दे रहे हैं और इसी मजदूरी के सहारे अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। वेतन नहीं मिलने से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च, इलाज और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना कठिन हो गया है। कई मजदूरों को उधार लेकर घर चलाना पड़ रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति को बताया कि लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण मजदूरों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।
मजदूरों की समस्याएं सुनने के बाद कुलपति ने उन्हें आश्वस्त किया कि उनके बकाया वेतन के भुगतान को लेकर आवश्यक प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मजदूरों की समस्या को गंभीरता से लिया गया है और जल्द ही भुगतान की दिशा में सकारात्मक पहल की जाएगी।
कुलपति के आश्वासन के बाद मजदूरों ने उम्मीद जताई है कि लंबे समय से लंबित उनका वेतन शीघ्र मिलेगा और उन्हें आर्थिक संकट से राहत मिल सकेगी। फिलहाल सभी की निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।