कहलगांव, भागलपुर। राजघाट रोड स्थित अग्रसेन स्मृति भवन में बीसवीं सदी के महान संत सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंसजी महाराज के प्रधान शिष्य महर्षि संतसेवी परमहंसजी महाराज का 19वां महापरिनिर्वाण दिवस श्रद्धा, भक्ति और सत्संग के वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी मनमोहन श्वेताम्बरी बाबा ने की।
आयोजन की व्यवस्था पिछले 19 वर्षों की तरह इस वर्ष भी जगदीश प्रसाद यादव, उमेश प्रसाद सिंह, निशिकांत सिंह, सुशील कुमार, पियूष कुमार और संतोष कुमार की छह सदस्यीय टीम द्वारा की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर महर्षि संतसेवी परमहंसजी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्य प्रवचनकर्ताओं में स्वामी नन्दन बाबा, स्वामी राधे बाबा, स्वामी मनीषानंद बाबा, हरिहर बाबा, नरसिंह बाबा, बिशु बाबा और मृत्युंजय बाबा शामिल थे। सभी वक्ताओं ने महर्षि संतसेवी परमहंसजी के व्यक्तित्व, कृतित्व और आध्यात्मिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
स्वामी नन्दन बाबा ने कहा कि सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंसजी महाराज महर्षि संतसेवी को अपना “मस्तिष्क” कहा करते थे। उन्होंने बताया कि गुरु और शिष्य का यह संबंध आध्यात्मिक समर्पण और ज्ञान की अद्वितीय मिसाल था।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिवनाथ बाबा ने किया। उन्होंने कहा कि बड़े गुरु महाराज और छोटे गुरु महाराज के बीच ‘क्यू और यू’ जैसा अटूट संबंध था। उन्होंने बताया कि महर्षि संतसेवी परमहंसजी गुरु महाराज के प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुनकर लिखते थे, जिनका लाभ आज भी लाखों श्रद्धालु पुस्तकों के माध्यम से प्राप्त कर रहे हैं।
इस अवसर पर प्रोफेसर राजेश कुमार पंडित ने भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उनकी प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भाव से सराबोर कर दिया।
अध्यक्षीय संबोधन में स्वामी मनमोहन श्वेताम्बरी बाबा ने महर्षि संतसेवी परमहंसजी को गुरु महाराज का “मानस पुत्र” बताया। कार्यक्रम के अंत में महर्षि संतसेवी परमहंसजी के प्रवचनों का वीडियो प्रसारण किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
मौके पर अशोक यादव, सुरेश पासवान, गुरुदेव मंडल सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में महाप्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।