पटना अब राजस्थान के कोटा के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा कोचिंग हब बन चुका है। रिपोर्टों के अनुसार बिहार में कोचिंग उद्योग का आकार 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। राज्य में हजारों कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं, जिनमें सबसे अधिक पटना में हैं। हाल के दिनों में खान ग्लोबल स्टडीज के संचालक फैसल खान उर्फ खान सर और जी.एस. एकेडमी के निदेशक रौशन आनंद के बीच विवाद, मारपीट और फायरिंग की घटनाओं ने कोचिंग उद्योग को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी, शिक्षकों की कमी और प्रतियोगी परीक्षाओं की बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने कोचिंग संस्थानों को तेजी से बढ़ने का मौका दिया है। बिहार में लगभग 52.5 प्रतिशत छात्र किसी न किसी कोचिंग से जुड़े हैं, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है।
बड़े कोचिंग संस्थानों में एक कक्षा में 500 से 1000 तक छात्रों के बैठने की बात सामने आती है। वहीं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाखों छात्र जुड़ते हैं। विशेषज्ञों का आरोप है कि कई संस्थान भ्रामक विज्ञापनों और टॉपर्स के नाम का इस्तेमाल कर छात्रों को आकर्षित करते हैं। शिक्षाविद डॉ. लक्ष्मीकांत सजल ने कोचिंग क्षेत्र में “शिक्षा माफिया” के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए बिहार सरकार अब कोचिंग संस्थानों के लिए नया रेगुलेशन एक्ट लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित नियमों के तहत 25 से अधिक छात्रों वाले सभी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण संचालन करने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, पुलिस सत्यापन, न्यूनतम स्थान, फीस वापसी और विज्ञापन संबंधी नियम भी लागू किए जाएंगे।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि सरकार जल्द ही कोचिंग संस्थानों के लिए सख्त नियामक व्यवस्था लागू करेगी ताकि छात्रों और अभिभावकों के हितों की रक्षा हो सके। सरकार का उद्देश्य शिक्षा के इस तेजी से फैलते कारोबार को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।