राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सख्ती, बीसीसीएल को मुआवजा देने और वीबीएमकेयू के दिवंगत प्रोफेसर के परिजनों को नियोजन देने का निर्देश
बोकारो। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, भारत सरकार की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा एक दिवसीय दौरे पर बोकारो पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने बोकारो सर्किट हाउस में धनबाद और बोकारो जिलों से संबंधित आयोग के समक्ष लंबित 20 शिकायतों की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण मामलों का निपटारा किया गया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
सबसे प्रमुख मामला धनबाद क्षेत्र में बीसीसीएल द्वारा भूमि अधिग्रहण के बावजूद मुआवजा नहीं दिए जाने का था। आयोग के समक्ष शिकायत आई थी कि एक महिला के परिजनों की जमीन का अधिग्रहण बीसीसीएल प्रबंधन ने वर्षों पहले किया था। जमीन पर खनन कार्य भी किया गया, लेकिन प्रभावित परिवार को अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला था। मामले की सुनवाई के बाद डॉ. आशा लकड़ा ने बीसीसीएल प्रबंधन को तत्काल मुआवजा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। आयोग की पहल से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
इसके अलावा विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (वीबीएमकेयू) के दिवंगत प्रोफेसर रेमंड केरकेट्टा से जुड़ा मामला भी सुनवाई में शामिल रहा। कोरोना काल के दौरान उनके निधन के बाद परिजनों को पेंशन, अन्य देय राशि तथा अनुकंपा के आधार पर नियोजन नहीं मिला था। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया।
सुनवाई के दौरान प्रोफेसर केरकेट्टा के परिजनों को लंबित राशि उपलब्ध कराई गई तथा नियोजन की प्रक्रिया भी पूरी कर दी गई। आयोग की इस कार्रवाई से परिवार को बड़ी राहत मिली है।
डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाना आयोग की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करें ताकि पीड़ितों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
आयोग की इस पहल को प्रभावित परिवारों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।