बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) के एसएमएस-2 विभाग में कार्यरत कर्मी सुभाष चंद्र मोदी की मौत के बाद उनका परिवार न्याय और आश्रित को नौकरी देने की मांग को लेकर आंदोलन पर उतर आया है। पिछले पांच दिनों से मृतक का शव बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) की मर्चरी में रखा हुआ है। बुधवार को मृतक की पत्नी, बेटी और अन्य परिजन एडीएम बिल्डिंग के सामने भूख हड़ताल पर बैठ गए। परिवार का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे और शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
परिवार के समर्थन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), आजसू पार्टी और विभिन्न विस्थापित संगठनों के प्रतिनिधि भी धरना स्थल पर पहुंचे। भाजपा नेत्री एंजेला सिंह ने आरोप लगाया कि बीएसएल प्रबंधन मृतक के आश्रित को नौकरी देने के मामले में टालमटोल कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस कठिन समय में मजदूर यूनियनों का रवैया भी निराशाजनक रहा है और वे परिवार के साथ मजबूती से खड़ी नहीं दिखीं।
विस्थापित नेता रघुनाथ महतो ने चेतावनी दी कि यदि बीएसएल प्रबंधन ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो बड़ी संख्या में विस्थापित भी आंदोलन में शामिल होंगे। वहीं आजसू नेता अजय सिंह ने कहा कि बीएसएल की दोहरी नीति अब स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से भी पीड़ित परिवार के समर्थन में आगे आने की अपील की।
मृतक की बेटी ने आरोप लगाया कि 30 अप्रैल को प्लांट में कार्य के दौरान उनके पिता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पहले उनका इलाज बीजीएच में और बाद में कोलकाता के अपोलो अस्पताल में कराया गया। परिवार का दावा है कि इलाज के दौरान स्वास्थ्य में सुधार हो रहा था, लेकिन अधिक खर्च का हवाला देकर बीएसएल प्रबंधन ने उन्हें वापस बीजीएच भेजने का दबाव बनाया। बाद में हालत बिगड़ने पर 15 जुलाई को रांची के मेडिका अस्पताल रेफर किया गया, जहां 17 जुलाई को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
फिलहाल परिवार आश्रित को नौकरी, मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग पर अड़ा हुआ है। आंदोलन के कारण क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और सभी की निगाहें अब बीएसएल प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं।
संवाददाता – चंदन सिंह बोकारो





