मैदानी इलाकों का प्रदूषण पहुंचा हिमालय तक, जहरीले बादल बढ़ा रहे कैंसर का खतरा
शुद्ध हवा और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए लोग अक्सर हिमालयी क्षेत्रों का रुख करते हैं, लेकिन एक नई स्टडी ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका एटमॉस्फेरिक एनवायरनमेंट में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, गंगा के मैदानी इलाकों का वायु प्रदूषण अब हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं तक पहुंच चुका है।
25 वर्षों के सैटेलाइट आंकड़ों के विश्लेषण में पाया गया कि 2010 से 2019 के बीच हवा में मौजूद कण पदार्थ यानी PM की मात्रा 2000-2009 की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है। बिहार और पश्चिम बंगाल इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।
शोध के मुताबिक, थर्मल पावर प्लांट, बायोमास जलाना और शहरी कचरे को जलाना प्रदूषण बढ़ाने के प्रमुख कारण हैं। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से निकलने वाला प्रदूषण पश्चिमी हिमालय तक पहुंच रहा है, जबकि बिहार और पश्चिम बंगाल का उत्सर्जन पूर्वी हिमालय को प्रभावित कर रहा है।
कोलकाता स्थित बोस इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने पाया कि हिमालय के ऊपर बनने वाले बादल अब मैदानी क्षेत्रों से जहरीली भारी धातुएं भी साथ ले जा रहे हैं। इन बादलों में कैडमियम, कॉपर और जिंक जैसी धातुओं की मात्रा 40 से 60 प्रतिशत तक बढ़ गई है। अध्ययन के अनुसार, पूर्वी हिमालय के ऊपर प्रदूषित बादलों में जहरीले तत्वों का स्तर सामान्य से डेढ़ गुना अधिक पाया गया, जिससे कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय बायोमास जलाना, धूल भरी आंधियां, फसल अवशेष जलाना और बढ़ता पर्यटन भी हिमालयी क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं।
वहीं, IQAir की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत दुनिया का छठा सबसे प्रदूषित देश रहा। देश में दिल्ली, असम, हरियाणा और बिहार सबसे अधिक प्रदूषित राज्यों में शामिल हैं। दूसरी ओर दक्षिण भारत के कई राज्यों में अपेक्षाकृत स्वच्छ हवा दर्ज की गई।
यह अध्ययन चेतावनी देता है कि यदि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो हिमालय जैसा संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र भी गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर सकता है।