बिहार के मधुबनी जिले में पर्यटन विकास कार्य के दौरान एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक खोज सामने आई है। हरलाखी प्रखंड के फुलहर गांव स्थित बागतराग क्षेत्र में तालाब की खुदाई के दौरान लगभग 800 साल पुरानी एक दुर्लभ प्रतिमा मिली है। प्रतिमा मिलने के बाद पूरे इलाके में इसकी चर्चा तेज हो गई है और इतिहासकारों व पुरातत्व विशेषज्ञों की रुचि भी बढ़ गई है।
जानकारी मिलने पर पर्यटन विभाग के आर्किटेक्ट माधव भारद्वाज ने मौके पर पहुंचकर स्थल का निरीक्षण किया। जांच के बाद उन्होंने बताया कि यह अवशेष 12वीं शताब्दी का प्रतीत होता है और यह बौद्ध देवी तारा की भग्न प्रतिमा है। प्रतिमा पर बौद्ध धर्म से संबंधित एक प्रसिद्ध मंत्र भी अंकित है। इसके अलावा सुनहरे रंग के एक पुरावशेष पर कैथी लिपि में ‘श्री सीताराम’ उत्कीर्ण पाया गया है। मामले की जानकारी पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को भेज दी गई है।
इंटैक बिहार स्टेट के कन्वेनर शिव कुमार मिश्र ने भी प्रतिमा की पहचान बौद्ध देवी तारा की प्रतिमा के रूप में की है। उन्होंने मधुबनी के जिलाधिकारी आनंद शर्मा से इस दुर्लभ धरोहर को सुरक्षित संग्रहित कर संग्रहालय में रखने की मांग की है। उनका कहना है कि खुदाई के दौरान क्षेत्र से और भी महत्वपूर्ण पुरावशेष मिलने की संभावना है।
फुलहर गांव का बागतराग क्षेत्र धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि यह वही पुष्पवाटिका है जहां माता जानकी और भगवान श्रीराम का प्रथम मिलन हुआ था। मिथिला नरेश जनक के महल के निकट स्थित इस स्थल पर प्राचीन काल में विशाल उपवन और ऐतिहासिक तालाब मौजूद था।
सरकार इस रामायणकालीन स्थल को प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर रही है। इसी योजना के तहत तालाब की खुदाई और सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है। इस परियोजना पर लगभग 31.13 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। खुदाई के दौरान मिली यह प्रतिमा क्षेत्र के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की नई कहानी सामने ला रही है।