नालंदा: विश्व प्रसिद्ध राजगीर मलमास मेले में पूर्णिमा के पावन अवसर पर शनिवार को दूसरा शाही स्नान संपन्न होगा। इस महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन को लेकर जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सुबह से ही विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत, महंत और देशभर से पहुंचे श्रद्धालु पवित्र गर्म जलकुंडों में स्नान कर पुण्य अर्जित करेंगे। प्रशासन को इस अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मलमास मेले का दूसरा शाही स्नान विशेष महत्व रखता है। माना जाता है कि पूर्णिमा के दिन राजगीर के पवित्र गर्म जलकुंडों में स्नान करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी आस्था के कारण बिहार समेत देश के विभिन्न राज्यों और पड़ोसी देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु राजगीर पहुंचे हैं।
परंपरा के अनुसार सबसे पहले विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत शाही स्नान करेंगे। संतों के जत्थे निर्धारित रेड कॉरिडोर से होते हुए ब्रह्मकुंड पहुंचेंगे, जहां वे स्नान और पूजा-अर्चना करेंगे। साधु-संतों के अनुष्ठान पूरा होने के बाद ही आम श्रद्धालुओं के लिए ब्रह्मकुंड परिसर खोला जाएगा। इस दौरान धार्मिक ध्वज-पताकाएं, जयघोष और शोभायात्राएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। मेला क्षेत्र, कुंड परिसर और प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल, दंडाधिकारी तथा स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। प्रमुख स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वास्थ्य शिविर, पेयजल, नियंत्रण कक्ष, स्वच्छता और आपातकालीन सेवाओं की विशेष व्यवस्था की गई है।
राजगीर मलमास मेले का धार्मिक महत्व पूरे देश में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि मलमास के दौरान 33 कोटि देवी-देवता राजगीर में निवास करते हैं और यहां स्नान-पूजन करने से पापों का नाश तथा पुण्य की प्राप्ति होती है। हर तीसरे वर्ष आयोजित होने वाले इस मेले में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
15 जून तक चलने वाले इस मेले में राजगीर के 22 पवित्र गर्म जलकुंडों और 52 धाराओं में स्नान का विशेष महत्व है। दूसरे शाही स्नान के बाद 11 जून को पुरुषोत्तमी एकादशी पर तीसरा और अंतिम शाही स्नान होगा, जबकि 15 जून को अमावस्या स्नान और देवताओं के विसर्जन के साथ मेले का समापन होगा।