केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह एक बार फिर बिहार के सीमांचल क्षेत्र को लेकर सक्रिय हो गए हैं। इस साल फरवरी में पूर्णिया, किशनगंज, अररिया और कटिहार के दौरे के बाद अब 2 मई को दिल्ली में एक अहम हाई लेवल बैठक होने जा रही है। इस बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ सकते हैं, जबकि राज्य के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।

इस बैठक का मुख्य फोकस सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, तस्करी और कथित डेमोग्राफिक बदलाव पर रहेगा। फरवरी दौरे के दौरान दिए गए निर्देशों पर अब तक की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। सीमांचल का इलाका नेपाल और पश्चिम बंगाल से सटा होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

बीजेपी का आरोप है कि इस क्षेत्र में घुसपैठ के कारण जनसंख्या संतुलन बदला है। वहीं, विपक्षी पार्टी आरजेडी के प्रवक्ता ने केंद्र सरकार पर सीमांचल के विकास की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार विकास की बजाय क्षेत्रीय पुनर्गठन की योजना बना रही है, हालांकि इस दावे का कोई आधिकारिक समर्थन नहीं है।

जेडीयू की ओर से Rajiv Rajan ने स्पष्ट किया है कि यह बैठक केवल राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी नियमित समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीमांचल बीजेपी के लिए रणनीतिक रूप से अहम क्षेत्र है, जहां दलित और पसमांदा मुस्लिम वोट बैंक पर भी पार्टी की नजर है।

सीमांचल की चार लोकसभा सीटों और 24 विधानसभा सीटों पर महागठबंधन और अन्य दलों का मजबूत प्रभाव रहा है। यही वजह है कि यह इलाका राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी संकेत दिए हैं कि घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में 2 मई की बैठक को न सिर्फ सुरक्षा बल्कि आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

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