Patna high court ने एक अहम फैसले में साफ कहा है कि केवल संदेह और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर पत्नी पर अवैध संबंध का आरोप लगाकर तलाक नहीं लिया जा सकता. अदालत ने कहा कि व्यभिचार जैसे गंभीर आरोप साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य और स्पष्ट तथ्यों का होना जरूरी है.
जस्टिस Tani Tagia और जस्टिस Alok Kumar Pandey की खंडपीठ ने दीपक मिश्रा (बदला हुआ नाम) की अपील खारिज करते हुए सिवान फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. पति ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी तलाक याचिका खारिज कर दी गई थी.
याचिकाकर्ता पति का आरोप था कि उसकी पत्नी दिप्ती देवी (बदला हुआ नाम) का किसी अन्य व्यक्ति से संबंध था और वह बिना बताए घर से बाहर जाती थी. पति ने दावा किया कि उसने पत्नी को एक युवक के साथ सिनेमा हॉल से निकलते देखा था. इसी आधार पर उसने अदालत से तलाक की मांग की थी.
हालांकि, हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि पति की याचिका में कई जरूरी तथ्यों का अभाव था. अदालत ने कहा कि जिस व्यक्ति पर संबंध का आरोप लगाया गया, उसका नाम तक स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया. घटना का समय, स्थान और अन्य परिस्थितियों का भी कोई ठोस उल्लेख नहीं था. इतना ही नहीं, जिस व्यक्ति के साथ संबंध होने का आरोप लगाया गया, उसे मामले में पक्षकार भी नहीं बनाया गया.
कोर्ट ने यह भी कहा कि बाद में गवाही के दौरान जोड़े गए तथ्यों के आधार पर किसी को राहत नहीं दी जा सकती. अदालत के मुताबिक, व्यभिचार और दुश्चरित्र जैसे आरोप बेहद गंभीर होते हैं, इसलिए इन्हें साबित करने के लिए मजबूत और स्पष्ट साक्ष्य जरूरी हैं.
खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल शक या संदेह के आधार पर किसी वैवाहिक रिश्ते को खत्म नहीं किया जा सकता. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पति की अपील खारिज करते हुए सिवान फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।
