दरभंगा से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जहां मिथिलांचल के लिए वर्ष 2026-27 का पंचांग तैयार कर लिया गया है। यह निर्णय अखिल भारतीय मैथिल महासभा भवन, बलभद्रपुर में आयोजित पंडित सभा की बैठक में लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति ने की, जबकि पूरी प्रक्रिया ज्योतिष शोध केंद्र के निदेशक सह सचिव की देखरेख में संपन्न हुई।
बैठक में मिथिला क्षेत्र के प्रमुख पंचांगकार जैसे और सहित दर्जनों विद्वानों ने भाग लिया। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि सभी पंचांगों में पर्व-त्योहार और शुभ मुहूर्त की तिथियों में एकरूपता रखी जाएगी, ताकि लोगों में भ्रम की स्थिति खत्म हो सके।
नए पंचांग के अनुसार वर्ष 2026-27 में विवाह के लिए कुल 63 शुभ दिन निर्धारित किए गए हैं, जिनकी शुरुआत नवंबर 2026 से होकर जुलाई 2027 तक होगी। वहीं उपनयन संस्कार के लिए 14 दिन तय किए गए हैं। द्विरागमन के लिए 27 दिन, मुंडन के लिए 22 दिन, गृहआरंभ के लिए 19 दिन और गृहप्रवेश के लिए 18 शुभ तिथियां निर्धारित की गई हैं। इसके अलावा देवप्रतिष्ठा के लिए भी 18 दिन तय किए गए हैं।
पंचांग में छठ पूजा और दुर्गा पूजा जैसे प्रमुख पर्वों की तिथियां भी निर्धारित कर दी गई हैं, जिससे पूरे मिथिला क्षेत्र में एक समान दिन पर उत्सव मनाया जा सकेगा।
इस अवसर पर ने बताया कि यह पंडित सभा वर्ष 1978 से लगातार आयोजित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य मिथिला की ज्योतिषीय परंपराओं को संरक्षित रखना और समाज में एकरूपता स्थापित करना है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले से अब पर्व-त्योहारों को लेकर किसी प्रकार का भ्रम नहीं रहेगा और श्रद्धालु एक समान तिथियों पर अपने धार्मिक कार्य संपन्न कर सकेंगे।
