पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए हम पार्टी के संरक्षक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य की शराबबंदी नीति पर एक बार फिर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस कानून की मंशा भले ही सकारात्मक रही हो, लेकिन इसके क्रियान्वयन में गंभीर खामियां हैं, जिसका खामियाजा खासकर गरीब, दलित और पिछड़े वर्गों को उठाना पड़ रहा है।

मांझी ने आरोप लगाया कि छोटे स्तर पर शराब रखने या सेवन करने वाले गरीब मजदूरों पर पुलिस की कार्रवाई तेज है, जिससे वे आसानी से कानून के शिकंजे में फंस जाते हैं और जेल तक पहुंच जाते हैं। वहीं दूसरी ओर बड़े शराब माफिया और संगठित सिंडिकेट खुलेआम कारोबार कर रहे हैं और कानून की पकड़ से बाहर हैं। उन्होंने इस स्थिति को “कागज पर अच्छा, लेकिन जमीन पर गरीबों के लिए काल और माफियाओं के लिए वरदान” बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि शराबबंदी के कारण राज्य में अवैध शराब का कारोबार तेजी से बढ़ा है। मांझी के अनुसार, माफिया अब यूरिया और अन्य खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल कर जहरीली शराब तैयार कर रहे हैं, जिससे गांवों में लगातार लोगों, खासकर युवाओं की मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं।

नई सरकार के संदर्भ में मांझी ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री इस नीति की व्यावहारिक समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को शराबबंदी कानून में मौजूद विसंगतियों को दूर करना चाहिए, ताकि एक तरफ गरीबों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिले और दूसरी ओर राज्य को राजस्व के नुकसान से भी बचाया जा सके।

मांझी ने स्पष्ट किया कि सुधार के बिना यह नीति अपने मूल उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाएगी और समाज में असमानता को और बढ़ा सकती है।

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