पटना में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2026 को लेकर सियासत तेज हो गई है। एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। एक ओर जहां एनडीए विपक्ष पर महिलाओं को धोखा देने का आरोप लगा रहा है, वहीं विपक्ष सत्ता पक्ष पर इस मुद्दे पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगा रहा है।

इसी कड़ी में आज पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस, आरजेडी और अन्य विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने विपक्ष पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री के बयान के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पलटवार करते हुए उनकी समझ और ज्ञान पर सवाल उठाए।

तेजस्वी यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बावजूद सम्राट चौधरी को महिला आरक्षण बिल की सही जानकारी नहीं है, जिसकी वजह से वे लगातार भ्रमित करने वाले बयान दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरजेडी और विपक्षी दल कभी भी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार 50 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

तेजस्वी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस विधेयक की आड़ में परिसीमन लागू करना चाहती थी, जिसका विपक्ष ने विरोध किया। उनका कहना था कि परिसीमन के जरिए उन क्षेत्रों में बदलाव की योजना थी जहां विपक्ष मजबूत है, ताकि राजनीतिक संतुलन बदला जा सके।

इसके साथ ही तेजस्वी यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार की सरकार अब दिल्ली और गुजरात के इशारे पर चलेगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को निर्देश देने के लिए पीएमओ से लोग आ रहे हैं।

तेजस्वी ने यह भी दावा किया कि आरजेडी हमेशा से महिला आरक्षण की समर्थक रही है और उनकी पार्टी ने चुनावों में महिलाओं को सबसे ज्यादा अवसर दिए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह विधेयक पहले ही पारित हो चुका था, तो इसे राष्ट्रपति के पास भेजने में देरी क्यों की गई।

कुल मिलाकर, नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर बिहार की राजनीति में टकराव और बयानबाजी तेज होती जा रही है।

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