बिहार के नवादा जिले से एक अनोखा सत्याग्रह सामने आया है, जहां नारदीगंज प्रखंड के ओड़ो पंचायत के पूर्व मुखिया अरविंद मिश्रा ने एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर बड़ी प्रतिज्ञा ली है। उन्होंने संकल्प लिया है कि जब तक ओड़ो रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव नहीं होगा, तब तक वे अपने पैरों में जूता-चप्पल धारण नहीं करेंगे।

 

वैशाख की तपती धूप और गर्म सड़कों पर नंगे पांव चल रहे अरविंद मिश्रा का यह आंदोलन पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। उनका कहना है कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि ओड़ो और आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों के लगभग 13 हजार लोगों के अधिकारों की लड़ाई है।

 

अरविंद मिश्रा के अनुसार, ओड़ो स्टेशन से करीब 28 ट्रेनों का आवागमन होता है, जिनमें 20 से 24 मालगाड़ियां भी शामिल हैं। लेकिन यात्रियों के लिए सिर्फ दो पैसेंजर ट्रेनों—दानापुर-तिलैया और गया-बख्तियारपुर—का ही ठहराव है। कोडरमा-पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस और वैशाली-गया एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनें यहां से गुजरती जरूर हैं, लेकिन रुकती नहीं हैं।

 

उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को इलाज, पढ़ाई और रोजगार के लिए राजगीर या तिलैया जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती है, जिससे भारी परेशानी होती है। स्टेशन पर पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं है। एक नलकूप लगा है, लेकिन उसमें कभी पानी नहीं आया।

 

पूर्व मुखिया ने सांसद विवेक ठाकुर पर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि उन्होंने 20 सितंबर और 9 दिसंबर 2025 को सांसद को पत्र भेजा, साथ ही रेल मंत्री को भी आवेदन दिया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

 

अब 1 मई मजदूर दिवस से आंदोलन को और तेज करने की तैयारी है। अरविंद मिश्रा का कहना है कि यह शांतिपूर्ण सत्याग्रह तब तक जारी रहेगा, जब तक ओड़ो स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज और यात्रियों की सुविधाएं बहाल नहीं हो जातीं।

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