भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण का गुरुवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अपराधियों की गोलीबारी में जान गंवाने वाले कृष्ण भूषण को पूरे प्रशासनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान परिवार, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय लोगों की आंखें नम दिखीं।
कृष्ण भूषण की मौत के बाद उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह अपने पति के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई देने के लिए तैयार नहीं हो रही थीं। बार-बार वह बिलखते हुए यही कह रही थीं कि अब उनका सहारा छिन गया। जिला अधिकारी आनंद शर्मा ने मौके पर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधाया और काफी समझाने के बाद पत्नी ने कांपते हाथों से पार्थिव शरीर पर फूल चढ़ाकर अंतिम विदाई दी।
बताया जा रहा है कि सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में नकाबपोश अपराधियों ने अचानक हमला कर दिया था। उस समय कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कार्यालय में मौजूद थे। अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। ऐसी स्थिति में वह चाहें तो अपनी जान बचाने के लिए छिप सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
उन्होंने बहादुरी दिखाते हुए अपराधियों का सामना किया। उनके सामने सिर्फ अपनी जान नहीं, बल्कि एक जनप्रतिनिधि की सुरक्षा, कार्यालय की गरिमा और अपने पद की जिम्मेदारी थी। इसी दौरान चली गोलियों में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई।
कृष्ण भूषण ने बीआईटी सिंदरी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और पहले ही प्रयास में बीपीएससी परीक्षा पास कर प्रशासनिक सेवा में आए थे। उनकी पहचान एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में थी।
घटना के 12 घंटे के भीतर पुलिस ने मुख्य आरोपी रामधनी यादव को मुठभेड़ में मार गिराया। प्रशासन अपनी कार्रवाई कर रहा है, लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या बिहार में ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारी सुरक्षित हैं?
कृष्ण भूषण अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।
