मुंबई महाराष्ट्र सरकार राज्य में कॉमर्शियल यात्री वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है. इसी कड़ी में परिवहन मंत्री प्रताप सर नायक ने सोमवार को एक अहम बैठक बुलाई है, जिसमें विभिन्न ऑटो-रिक्शा और टैक्सी यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. यह बैठक दोपहर 12:30 बजे मंत्री कक्ष में आयोजित की जाएगी.

बैठक में श्रमिक नेता संजय नरुपम और ट्रेड यूनियन लीडर शशांक शरद राव  समेत कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. इस बैठक का उद्देश्य सरकार के प्रस्तावित फैसले पर चर्चा करना और यूनियनों से सुझाव लेना है.

दरअसल, इसी महीने की शुरुआत में मंत्री सरनाइक ने घोषणा की थी कि राज्यभर में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किया जाएगा. प्रस्ताव के अनुसार, 1 मई से दस्तावेजों के सत्यापन के साथ-साथ चालकों की मराठी भाषा दक्षता की भी जांच शुरू की जाएगी.

सरकार ने इसके लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की है. मुंबई मराठी साहित्य संघ को चालकों को मराठी सिखाने की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि कोंकण क्षेत्र में कोंकण मराठी साहित्य परिषद इस काम में सहयोग करेगी. सरकार का मानना है कि इससे न केवल भाषा का प्रचार-प्रसार होगा बल्कि यात्रियों और चालकों के बीच संवाद भी बेहतर होगा.

मंत्री सरनाइक ने स्पष्ट किया कि मराठी लिखना जरूरी नहीं है, लेकिन बोलना और समझना अनिवार्य होगा. उन्होंने कहा कि 1 मई से एक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें फर्जी दस्तावेजों की जांच के साथ यह भी देखा जाएगा कि चालक मराठी बोल सकते हैं या नहीं.

सरकार ने चेतावनी दी है कि नियमों का पालन न करने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इस पायलट प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य परिवहन लाइसेंस प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और अनियमितताओं पर रोक लगाना है. धीरे-धीरे इस व्यवस्था को पूरे महाराष्ट्र में लागू किया जाएगा.

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