वरिष्ठ मंजूषा कलाकार निर्मला देवी की स्मृति में प्राकृतिक रंग कार्यशाला, लोककला की परंपरा को बचाने का संदेश

भागलपुर। मोहद्दीनगर स्थित विषहरी मंदिर परिसर में वरिष्ठ मंजूषा कलाकार स्वर्गीय निर्मला देवी की स्मृति में मंजूषा प्राकृतिक रंग कार्यशाला सह प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। मंजूषा गुरु मनोज पंडित के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में कलाकारों ने प्राकृतिक रंगों के निर्माण, संरक्षण और मंजूषा चित्रकारी में उनके प्रयोग की बारीकियों को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक मंजूषा कला और प्राकृतिक रंगों की पुरानी तकनीक को संरक्षित करते हुए नई पीढ़ी को लोककला से जोड़ना रहा।

 

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कार्यशाला के दौरान कलाकारों ने पारंपरिक तरीके से प्राकृतिक रंग तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी दी। प्रतिभागियों को बताया गया कि प्राकृतिक स्रोतों से तैयार किए जाने वाले रंगों को किस प्रकार सुरक्षित रखा जाता है और मंजूषा चित्रकारी में उनका कलात्मक इस्तेमाल कैसे किया जाता है। कलाकारों ने रंगों के निर्माण से लेकर उन्हें चित्रों में प्रयोग करने तक की विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन भी किया।

 

कार्यक्रम में कई मंजूषा कलाकारों ने लोककला पर आधारित अपनी पेंटिंग प्रदर्शित की। प्रदर्शनी में मंजूषा कला की पारंपरिक शैली के साथ-साथ लोक कथाओं और अंग क्षेत्र की संस्कृति से जुड़े विभिन्न चित्रों को प्राकृतिक रंगों के माध्यम से उकेरा गया। इन कलाकृतियों में पारंपरिक लोक संस्कृति, धार्मिक प्रसंगों और मंजूषा चित्रांकन की विशिष्ट शैली की झलक देखने को मिली।

 

आयोजकों ने कहा कि मंजूषा कला केवल चित्रकारी की एक शैली नहीं, बल्कि भागलपुर और अंग क्षेत्र की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बदलते समय में इस कला की पारंपरिक तकनीकों को सुरक्षित रखना जरूरी है। खासकर प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण हैं।

 

कार्यशाला के माध्यम से युवा कलाकारों और कला प्रेमियों को मंजूषा की पारंपरिक विधाओं से परिचित कराने का प्रयास किया गया। आयोजकों के अनुसार, इस तरह के कार्यक्रम कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ मंजूषा कला को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने का मंच भी प्रदान करते हैं।

 

स्वर्गीय निर्मला देवी की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम ने लोककला के संरक्षण और प्राकृतिक रंगों के पुनर्प्रयोग का संदेश दिया। कलाकारों ने भी मंजूषा कला की परंपरा को आगे बढ़ाने और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया।

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