भागलपुर। खरीक प्रखंड के राघोपुर कटाव प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर अर्पणा कुमारी ने ग्रामीणों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि राघोपुर की मौजूदा स्थिति को केवल बाढ़ या अचानक आई प्राकृतिक आपदा मानकर छोड़ना उचित नहीं होगा। उपलब्ध विभागीय दस्तावेजों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि विक्रमशिला सेतु के आसपास गंगा के प्रवाह, कटाव और सुरक्षा उपायों की जरूरत कई वर्षों से सरकारी स्तर पर दर्ज होती रही है।
अर्पणा कुमारी के अनुसार, 6 फरवरी 2023 की विभागीय निरीक्षण कार्यवाही में विक्रमशिला सेतु के निकट गंगा नदी के उत्तर की ओर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए Guide Bund और River Training Work की आवश्यकता का उल्लेख किया गया था। उन्होंने बताया कि 18 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर ने पूर्व मध्य रेलवे, सोनपुर को पत्र भेजकर गंगा के उत्तरी तट पर पुल के upstream और downstream में Guide Bund निर्माण का अनुरोध किया था।
उन्होंने कहा कि 7 नवंबर 2025 को रेलवे और संबंधित विभागों ने संयुक्त निरीक्षण भी किया था। इसके बाद 9 जनवरी 2026 को पूर्व मध्य रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय से राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर को पत्र भेजकर Guide Bund निर्माण के लिए MoRTH से प्राप्त सहमति या स्वीकृति रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया।
अर्पणा कुमारी ने सवाल उठाया कि जब वर्ष 2023 से नदी सुरक्षा को लेकर निरीक्षण और पत्राचार हो रहा था, तो अगस्त 2026 में राघोपुर में गंभीर कटाव और 24 अगस्त की रात तटबंध टूटने की स्थिति क्यों बनी। उन्होंने कहा कि उनका सवाल किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि व्यवस्था से है।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात कर समस्याएं सुनीं और सामुदायिक रसोई का भी जायजा लिया। उन्होंने कहा कि पानी कम होने के बावजूद कीचड़, गंदगी, दुर्गंध और संक्रमण का खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव, स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई और राहत सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था की मांग की।
अर्पणा कुमारी ने बताया कि 15 सितंबर को प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में भी उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय समीक्षा की मांग की है। उन्होंने वैज्ञानिक Hydrological और Morphological Study, Guide Bund, River Training Work, मजबूत तटबंध और दीर्घकालिक नदी सुरक्षा योजना लागू करने की मांग की।






