भागलपुर। भागलपुर की लाइफलाइन माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2026 से विक्रमशिला सेतु पर बनाए गए बेली ब्रिज को हटा दिया जाएगा। इसके बाद पुल पर आम लोगों का आवागमन बंद रहेगा, ताकि क्षतिग्रस्त हिस्से के स्थायी पुनर्निर्माण और जरूरी मरम्मत का काम तेजी से पूरा किया जा सके।
दरअसल, 3 मई 2026 की मध्यरात्रि विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या 133 के आसपास पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर गंगा नदी में गिर गया था। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, घटना की सूचना उसी रात प्रशासन को मिली थी। राहत की बात रही कि हादसे में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर से नवगछिया, कोसी और सीमांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी बुरी तरह प्रभावित हो गई थी।
लोगों की परेशानी को देखते हुए क्षतिग्रस्त हिस्से पर वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की जिम्मेदारी बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन यानी BRO को दी गई। मई में युद्धस्तर पर बेली ब्रिज का निर्माण शुरू किया गया। स्टील स्ट्रक्चर और गर्डर की लॉन्चिंग के बाद करीब एक महीने के भीतर वैकल्पिक पुल तैयार कर लिया गया।
7 जून 2026 से छोटे वाहनों के लिए बेली ब्रिज पर आवागमन शुरू किया गया। वाहनों के वजन को लेकर भी निर्धारित सीमा रखी गई थी। इसके शुरू होने से भागलपुर और नवगछिया के बीच आवागमन करने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली और लंबे समय से प्रभावित संपर्क व्यवस्था दोबारा बहाल हुई।
अब यह अस्थायी व्यवस्था भी समाप्त होने जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, बेली ब्रिज हटाकर विक्रमशिला सेतु के स्थायी पुनर्स्थापन का काम तेज किया जाएगा। इस दौरान क्षतिग्रस्त हिस्से के पुनर्निर्माण के अलावा सुपर स्ट्रक्चर, बेयरिंग और एक्सपेंशन ज्वाइंट से जुड़े जरूरी कार्य भी किए जाएंगे।
1 अक्टूबर के बाद भागलपुर और नवगछिया के बीच आवागमन को लेकर वैकल्पिक व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती होगी। लोगों को सड़क के वैकल्पिक मार्गों और जल परिवहन पर निर्भर रहना पड़ सकता है। त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ के बीच प्रशासन के सामने सुरक्षित और सुगम यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना अहम चुनौती होगी।






