सहरसा सदर अस्पताल में रविवार की शाम सड़क हादसे में घायल एक 18 वर्षीय युवक की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। मृतक के परिजनों ने डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए इमरजेंसी में हंगामा किया। स्थिति बिगड़ने के बाद ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी इमरजेंसी से बाहर निकल गए। हंगामे के कारण करीब दो घंटे तक इमरजेंसी सेवा प्रभावित रही, जिससे अस्पताल पहुंचे अन्य मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मृतक की पहचान बनगांव थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर-1 निवासी दुलारचंद राम के 18 वर्षीय पुत्र नीरज कुमार के रूप में हुई है। मृतक के परिजन ने बताया कि शनिवार को नीरज बाइक से रजौरा गांव मजदूरी का पैसा मांगने गया था। वहां से वापस लौटने के दौरान देवन मोड़ के समीप एक अज्ञात वाहन ने उसकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में नीरज गंभीर रूप से घायल हो गया।
परिजन घायल नीरज को इलाज के लिए सहरसा सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टर ने उसे रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन उसे शहर के एक निजी क्लीनिक में भर्ती कराया। रविवार की शाम निजी क्लीनिक के डॉक्टर ने उसकी स्थिति गंभीर बताते हुए जवाब दे दिया। इसके बाद परिजन नीरज को दोबारा सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
मौत की जानकारी मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल की इमरजेंसी में हंगामा करने लगे। परिजनों का आरोप था कि सदर अस्पताल में नीरज का सही तरीके से इलाज नहीं किया गया, जिसके कारण उसकी मौत हुई। हंगामे के दौरान डॉक्टरों के साथ कथित बदसलूकी भी हुई, जिसके बाद ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी वहां से बाहर निकल गए।
हंगामे के कारण रविवार शाम करीब 6 बजे से सदर अस्पताल की इमरजेंसी सेवा प्रभावित रही। लगभग दो घंटे तक सेवा बाधित रहने से अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे अन्य घायल मरीजों और उनके परिजनों को भी काफी परेशानी हुई। इसी दौरान पतरघट थाना क्षेत्र के मोनू कुमार भी हादसे में घायल होकर सदर अस्पताल पहुंचे थे। उनकी स्थिति चिंताजनक होने पर परिजन उन्हें भी निजी अस्पताल लेकर चले गए।
इस मामले में सहरसा सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद ने कहा कि घटना की जानकारी मिली है। मामले की जांच कराई जाएगी।
वहीं इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात डॉ. राजेश रंजन ने बताया कि नीरज को एक दिन पहले ही अस्पताल लाया गया था और उसी समय उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए रेफर कर दिया गया था। परिजन उसे निजी अस्पताल ले गए, जहां रविवार को उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि इसके बाद परिजन वेंटिलेटर और ऑक्सीजन लगाने की मांग को लेकर हंगामा करने लगे।
फिलहाल घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और इमरजेंसी सेवा को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या नहीं।






