सहरसा के महिषी थाना एवं अंचल क्षेत्र के लहुआर गांव में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर विवाद सामने आया है। गांव के नथन राम सहित दर्जनों महादलित ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी पर कार्रवाई में भेदभाव करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सरकारी व धार्मिक न्यास की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है।
ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, खाता संख्या 289 के तहत विभिन्न खेसरा नंबरों में दर्ज जमीन बिहार सरकार के नाम से दर्ज है। वहीं खाता संख्या 235 के खेसरा संख्या 188 में 16 डिसमल जमीन राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी के नाम से दर्ज बताई गई है। आरोप है कि इन जमीनों के कुछ हिस्सों पर लोगों ने कथित तौर पर अवैध कब्जा कर घर-मकान और अन्य निर्माण कर लिया है।
आवेदक नथन राम का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उनके घर को तोड़ दिया गया, जबकि आसपास मौजूद अन्य कथित अतिक्रमणकारियों के खिलाफ उसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। इसी को लेकर ग्रामीणों ने कार्रवाई में भेदभाव की आशंका जताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मामले में महिषी अंचलाधिकारी संजय कुमार ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरोप लगाने वाले ऐसे ही आरोप लगाते रहते हैं। हालांकि, ग्रामीण अपने आवेदन के माध्यम से पूरे मामले की जांच की मांग पर कायम हैं।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से बिहार सरकार और राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी के नाम दर्ज जमीन की जांच कराने, सरकारी एवं धार्मिक न्यास की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।






