
रायपुर में भाई-बहन के प्यार और त्याग की ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने डॉक्टरों और अस्पताल में मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया। 17 वर्षीय युवक राजीव (बदला हुआ नाम) करीब एक साल पहले सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया था। ऑफिस से घर लौटते समय तेज रफ्तार ट्रक ने उसकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में उसके सिर पर गंभीर चोट आई और उसकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई।
डॉक्टरों के मुताबिक राजीव की दोनों कॉर्निया बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं और रोशनी लौटने की उम्मीद बेहद कम थी। हादसे के बाद हंसमुख और मेहनती राजीव की जिंदगी बदल गई। वह अक्सर अपनी दीदी से कहता था कि अब उसे कुछ दिखाई नहीं देता और वह आगे क्या करेगा।
भाई की हालत देखकर उसकी बड़ी बहन सुनीता (बदला हुआ नाम) ने बड़ा फैसला लिया। शादीशुदा और दो बच्चों की मां सुनीता ने डॉक्टरों से पूछा कि क्या वह अपनी एक आंख की कॉर्निया अपने भाई को दान कर सकती है। डॉक्टरों ने बताया कि एक आंख की रोशनी के साथ सामान्य जीवन जिया जा सकता है।
पति और बच्चों से बात करने के बाद सुनीता ने अपनी कॉर्निया भाई को दान करने का निर्णय लिया। डॉक्टरों ने कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया। ऑपरेशन के चार दिन बाद जब राजीव की आंखों से पट्टी हटाई गई तो उसे धुंधला ही सही, लेकिन दिखाई देने लगा। उसने सबसे पहले अपनी दीदी को देखा और भावुक होकर उससे लिपट गया। राजीव ने कहा, “दीदी, तुमने तो मुझे नई जिंदगी दे दी।”
डॉक्टरों के मुताबिक अब राजीव धीरे-धीरे चीजों को देख पा रहा है और सामान्य जिंदगी की ओर लौट रहा है। डोनर और मरीज की पहचान गोपनीय रखने के नियम के कारण दोनों के नाम बदले गए हैं।
प्रदेश में 25 अगस्त से 8 सितंबर तक नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इस दौरान रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में अब तक तीन आंखें दान की जा चुकी हैं। विशेषज्ञों ने लोगों से नेत्रदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने और जरूरतमंदों की जिंदगी में रोशनी लाने की अपील की है।







