बिहार में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए सरकार लाइव क्लास, एआई आधारित पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग जैसी योजनाओं पर जोर दे रही है। लेकिन भोजपुर जिले से सामने आई तस्वीर सरकारी दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है। यहां पहली से पांचवीं कक्षा तक के 75 बच्चे आज भी एक ही कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं।
मामला बड़हरा प्रखंड की पश्चिमी बबूरा पंचायत के न्यू प्राथमिक विद्यालय, कुतुबपुर डेरा का है। अक्टूबर 2004 में स्थापित इस विद्यालय को करीब 22 साल बाद भी अपना भवन नसीब नहीं हुआ है। स्थापना के बाद से स्कूल कभी एक तो कभी दूसरे सामुदायिक भवन में संचालित होता रहा है।
अप्रैल 2026 में विद्यालय को एक दूसरे सामुदायिक भवन में स्थानांतरित किया गया, लेकिन यहां भी बच्चों को पढ़ाई के लिए सिर्फ एक कमरा ही मिल सका। इसी एक कमरे में पहली से पांचवीं तक की पांच कक्षाएं चल रही हैं। पर्याप्त बेंच-डेस्क नहीं होने के कारण कुछ बच्चे बेंच पर तो कुछ फर्श पर बैठकर पढ़ाई करते हैं।
एक ही कमरे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाना शिक्षकों के लिए भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। विद्यालय के शिक्षक कुमार मोहित ने बताया कि 75 बच्चों को एक साथ पढ़ाना काफी मुश्किल है। सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षण कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि विद्यालय भवन निर्माण को लेकर कई बार अधिकारियों से मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
वीओ- ग्रामीण पिंटू का कहना है कि स्कूल फुटबॉल की तरह एक सामुदायिक भवन से दूसरे सामुदायिक भवन में भटक रहा है। सरकारी दावे अपनी जगह हैं, लेकिन हकीकत यह है कि बच्चे आज भी एक कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने विद्यालय के लिए जल्द स्थायी भवन निर्माण की मांग की है।
अब सवाल यह है कि जब शिक्षा को आधुनिक और बेहतर बनाने की बात हो रही है, तो आखिर भोजपुर के इन 75 बच्चों को अपना स्कूल भवन कब मिलेगा?





