पटना में मोदी मंदिर की मुहिम चलाने वाले राजन सिंह कौन? पहचान और दावों पर उठे सवाल
पटना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंदिर बनाने की मुहिम और दिल्ली के प्रेस क्लब में मोदी चालीसा के पाठ के बाद राजन सिंह चर्चा में हैं। लेकिन इस अभियान के साथ उनकी ट्रांसजेंडर पहचान, राजनीतिक संबंधों और दावों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
राजन सिंह का दावा है कि 29 जुलाई को बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड की बैठक में उन्होंने पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंदिर बनाने का प्रस्ताव रखा था। उनके अनुसार सरकार को प्रस्ताव भेजकर पांच एकड़ जमीन और 112 करोड़ रुपये की मांग की गई है। हालांकि बोर्ड की सदस्य अनुप्रिया ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि बोर्ड में ऐसा कोई निर्णय नहीं हुआ। उनके मुताबिक यह राजन सिंह की व्यक्तिगत मांग हो सकती है, इसे पूरे ट्रांसजेंडर समुदाय की मांग नहीं माना जा सकता।
ट्रांसजेंडर पहचान पर विवाद
राजन सिंह के खिलाफ लखनऊ में ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट प्रियंका की शिकायत के बाद कथित तौर पर मामला दर्ज हुआ है। शिकायत में उन पर फर्जी तरीके से खुद को किन्नर बताने और समुदाय के नाम का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए हैं।
राजन इन आरोपों को खारिज करते हैं। उनका कहना है कि उनके पास ट्रांसजेंडर प्रमाणपत्र है और उनकी पहचान पर सवाल राजनीतिक कारणों से उठाए जा रहे हैं। हालांकि उनके दस्तावेजों की स्वतंत्र आधिकारिक जांच की पुष्टि सामने नहीं आई है।
राजनीति से भी जुड़ा दावा
राजन सिंह का दावा है कि उन्होंने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ा था और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद बिहार में सक्रिय होने की सलाह मिली थी। उनका यह भी दावा है कि अगस्त 2025 में उन्हें बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया गया।
राजन के अनुसार वे सारण जिले के एकमा क्षेत्र के रहने वाले हैं। उन्होंने 2024 में दक्षिण दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था, जहां उन्हें 324 वोट मिले।
मोदी चालीसा का पाठ
राजन का कहना है कि उन्होंने खुद मोदी चालीसा लिखी है और हर गुरुवार इसका पाठ कराने की योजना है। उन्होंने मंदिर के लिए सरकारी जमीन और धन नहीं मिलने पर बोर्ड के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की बात भी कही है।
फिलहाल राजन के दावों और उनके विरोध में लगाए गए आरोपों के बीच कई सवाल अनुत्तरित हैं। मंदिर प्रस्ताव, बोर्ड की सहमति और ट्रांसजेंडर प्रमाणपत्र की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही पूरे विवाद की तस्वीर साफ होगी।






