पटना के गर्दनीबाग स्थित धरना स्थल पर 70वीं बीपीएससी परीक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए गए हैं। रौशन आनंद सर ने परीक्षा और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए मामले की जांच कराने की मांग की है। उनके बयान के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
रौशन आनंद ने धरना स्थल पर संबोधित करते हुए 70वीं बीपीएससी परीक्षा के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों की योग्यता को लेकर दावा किया। उन्होंने कहा कि चयनित कई नए अधिकारी अगस्त तक ‘Governor’ शब्द भी सही तरीके से नहीं लिख पाते हैं। हालांकि, उनके इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि परीक्षा और चयन प्रक्रिया से जुड़े तमाम सवालों का निष्पक्ष तरीके से परीक्षण होना चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों और आम लोगों के बीच परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे।
70वीं बीपीएससी परीक्षा बिहार में पहले भी अभ्यर्थियों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच चर्चा का विषय रही है। परीक्षा प्रक्रिया, परिणाम और चयन से जुड़े मुद्दों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में रौशन आनंद के ताजा बयान ने इस बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि राज्य की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। वहीं, परीक्षा से जुड़े किसी भी आरोप की स्थिति में तथ्यों के आधार पर जांच कर स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
फिलहाल रौशन आनंद की ओर से लगाए गए आरोपों पर संबंधित स्तर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उनके द्वारा बताए गए दावे के समर्थन में कौन से दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत किए गए हैं। ऐसे में 70वीं बीपीएससी परीक्षा को लेकर उठे इन सवालों की वास्तविकता जांच और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।






