बिहार के रोहतास जिले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान दी गई मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल एक दिव्यांग महिला के लिए राहत की जगह परेशानी बन गई. डेहरी-ऑन-सोन के चौधरी मोहल्ला निवासी तारामुनी देवी को 25 मार्च को आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के हाथों बैटरी चालित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल दी गई थी, लेकिन साइकिल घर पहुंचने से पहले ही रास्ते में बंद हो गई.
तारामुनी देवी पोलियो से दिव्यांग हैं. उनके पति कुंदन चौधरी भी दिव्यांग हैं और कोचिंग चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. परिवार का कहना है कि सरकारी मदद की खुशी कुछ ही घंटों में खत्म हो गई. खराब ट्राइसाइकिल को किसी तरह ठेलकर घर लाना पड़ा और तब से वे लगातार अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं.
तारामुनी देवी ने कहा कि उन्हें बड़ी उम्मीद के साथ ट्राइसाइकिल मिली थी ताकि आने-जाने में सुविधा हो सके, लेकिन अब स्थिति पहले से ज्यादा कठिन हो गई है. उनका आरोप है कि हर कार्यालय से उन्हें दूसरी जगह भेज दिया जाता है और केवल आश्वासन मिल रहा है.
वहीं, कुंदन चौधरी ने इसे सरकारी मदद के नाम पर छलावा बताया. उन्होंने कहा कि शिकायत करने पर अधिकारियों ने बताया कि समस्या का समाधान रोहतास प्रखंड में लगने वाले कैंप में होगा, जो उनके घर से करीब 50 किलोमीटर दूर है. बिना साधन के वहां पहुंचना दिव्यांग दंपति के लिए बेहद मुश्किल है.
यह ट्राइसाइकिल मुख्यमंत्री दिव्यांगजन सशक्तिकरण संबल योजना के तहत दी गई थी. योजना का उद्देश्य दिव्यांग छात्रों और रोजगारपेशा लोगों को आवागमन में सहायता देना है, लेकिन इस घटना ने योजना की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मामले की जानकारी मिलने पर सहायक निदेशक आफताब करीम ने कहा कि प्रशासन जल्द ही समस्या का समाधान करेगा. हालांकि, अब देखना होगा कि दिव्यांग दंपति को राहत कब तक मिलती है.
