बच्चों को शांत कराने, खाना खिलाने या व्यस्त रखने के लिए माता-पिता अक्सर मोबाइल फोन थमा देते हैं, लेकिन यही आदत उनके मानसिक विकास पर भारी पड़ सकती है। दिल्ली एम्स की ताजा स्टडी में खुलासा हुआ है कि कम उम्र में ज्यादा स्क्रीन देखने वाले बच्चों में ऑटिज्म के लक्षण तेजी से बढ़ रहे हैं।

एम्स के पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी विभाग ने 2,857 बच्चों पर अध्ययन किया। रिपोर्ट के अनुसार, एक साल से कम उम्र के बच्चे यदि लंबे समय तक मोबाइल या टीवी देखते हैं, तो 3 साल की उम्र तक उनमें ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के लक्षण विकसित हो सकते हैं। रिसर्च में यह भी सामने आया कि कई बच्चों को ध्यान लगाने में दिक्कत, नींद की समस्या और व्यवहार संबंधी परेशानियां थीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसी दौरान दिमाग तेजी से विकसित होता है। यदि इस समय स्क्रीन टाइम अधिक हो जाए तो मानसिक और सामाजिक विकास प्रभावित हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि जन्म के बाद कम से कम 18 महीनों तक बच्चों को स्क्रीन से दूर रखना चाहिए।

ऑटिज्म एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें बच्चे का व्यवहार, बातचीत करने का तरीका और सामाजिक मेलजोल प्रभावित होता है। ऐसे बच्चे अक्सर नजरें मिलाने से बचते हैं, नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया नहीं देते, अकेले रहना पसंद करते हैं और बातचीत में रुचि कम दिखाते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में हर 100 में से एक बच्चा ऑटिज्म से प्रभावित है। भारत में भी इसकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। लड़कों में यह समस्या लड़कियों की तुलना में करीब चार गुना ज्यादा देखी जाती है।

इलाज के लिए बिहेवियरल, स्पीच और लैंग्वेज थेरेपी को प्रभावी माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते पहचान और थेरेपी शुरू हो जाए तो बच्चों में काफी सुधार संभव है।

WHO के मुताबिक, एक साल से कम उम्र के बच्चों का स्क्रीन टाइम शून्य होना चाहिए, जबकि 1 से 4 साल तक के बच्चों के लिए एक घंटे से ज्यादा स्क्रीन देखना नुकसानदायक माना गया है।

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