बिहार के सीतामढ़ी में लखनदेई नदी की सफाई को लेकर एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल सामने आई है। इस अभियान की खास बात यह रही कि इसकी अगुवाई खुद जिलाधिकारी रिची पांडे ने की। उन्होंने न सिर्फ अभियान की निगरानी की, बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ नदी में उतरकर श्रमदान भी किया। उनका यह कदम पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है और लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का मजबूत संदेश दे रहा है।

दरअसल, जिला प्रशासन द्वारा शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य आम लोगों को यह समझाना है कि नदी और जलस्रोतों की सफाई सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। इसी सोच के तहत डीएम ने खुद उदाहरण पेश किया। उनके साथ कई स्थानीय लोग भी इस अभियान में शामिल हुए और नदी से कचरा निकालने में सहयोग किया।

लखनदेई नदी का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी है। मान्यता है कि इसका संबंध रामायण काल से है और इसे माता सीता की सहेली के रूप में भी जाना जाता है। बावजूद इसके, यह नदी पिछले कुछ वर्षों से प्रदूषण, गंदे नालों के पानी और अतिक्रमण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। कई जगहों पर इसकी स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है।

जिलाधिकारी रिची पांडे ने इस मौके पर कहा कि लखनदेई नदी शहर की पहचान और आस्था से जुड़ी हुई है, इसलिए इसे स्वच्छ और संरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने इसे सिर्फ एक शुरुआत बताते हुए लोगों से अपील की कि वे भी आगे आकर इस अभियान में भाग लें।

इस पहल के बाद शहर में स्वच्छता को लेकर सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है। लोग न केवल इस प्रयास की सराहना कर रहे हैं, बल्कि भविष्य में भी ऐसे अभियानों से जुड़ने की इच्छा जता रहे हैं। उम्मीद है कि प्रशासन और जनता के संयुक्त प्रयास से लखनदेई नदी को फिर से स्वच्छ और जीवंत बनाया जा सकेगा।

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