बिहार सरकार ने सुनियोजित शहरी विकास की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राज्य के 11 स्थानों पर ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का फैसला लिया है। यह योजना बिहार टाउन प्लानिंग स्कीम नियमावली, 2025 के तहत लागू होगी। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि जमीन मालिकों को सशक्त बनाने की पहल भी है।

इन टाउनशिप का निर्माण पटना, सोनपुर, गया, सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी और दरभंगा के आसपास किया जाएगा। सबसे बड़ा प्रोजेक्ट पाटलिपुत्र टाउनशिप होगा, जो पटना के आसपास विकसित किया जाएगा। सभी टाउनशिप को एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और प्रमुख सड़कों से जोड़ा जाएगा, जिससे कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

इस योजना की खास बात है लैंड पूलिंग मॉडल। इसके तहत किसान अपनी जमीन देंगे और विकास के बाद उन्हें 55% जमीन वापस मिलेगी, जबकि 45% जमीन का उपयोग सड़क, पार्क, गरीबों के आवास और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए किया जाएगा। सरकार का दावा है कि विकसित जमीन की कीमत 10 से 20 गुना तक बढ़ सकती है, जिससे किसानों को फायदा होगा।

हालांकि, जमीन को लेकर किसानों में चिंता भी है और कई जगह विरोध की शुरुआत हो चुकी है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि ड्राफ्ट प्लान जारी होने के बाद आपत्तियां ली जाएंगी और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जिला स्तर पर निगरानी समिति और शिकायत निवारण के लिए ट्रिब्यूनल भी बनाया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन टाउनशिप के साथ इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और पार्क विकसित किए गए, तो बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे निर्माण, सेवा और उद्योग क्षेत्रों में तेजी आएगी।

सरकार ने 2027 तक जमीन चिन्हित करने और मास्टर प्लान लागू करने का लक्ष्य रखा है। अगर योजना सफल रही, तो बिहार में आधुनिक, व्यवस्थित और भविष्य के शहरों का विकास होगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।

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