क्या शादी के सिर्फ दो महीने बाद पति-पत्नी आपसी सहमति से तलाक ले सकते हैं? इस सवाल पर Patna High Court ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है, जो हर शादीशुदा जोड़े के लिए जानना जरूरी है।

 

पटना हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(बी) के तहत आपसी सहमति से तलाक तभी संभव है, जब पति-पत्नी कम-से-कम एक साल तक अलग रह चुके हों। यानी सिर्फ कुछ महीनों की नाराजगी या दूरी के आधार पर तुरंत तलाक नहीं मिल सकता।

 

यह फैसला जस्टिस नानी तागिया और जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत ने शिवहर परिवार न्यायालय के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें तलाक की संयुक्त याचिका को खारिज कर दिया गया था।

 

दरअसल, इस मामले में पति-पत्नी ने आपसी सहमति से तलाक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन जांच में पता चला कि दोनों कानून में तय एक साल की अनिवार्य अवधि तक अलग नहीं रहे थे।

 

रिकॉर्ड के अनुसार, 15 मार्च 2023 को दोनों के बीच वैवाहिक संबंध स्थापित हुए थे, जबकि 11 मई 2023 को ही तलाक की याचिका दाखिल कर दी गई। यानी शादी के महज दो महीने बाद ही रिश्ता खत्म करने की कोशिश की गई।

 

हाईकोर्ट ने कहा कि ‘अलग रहना’ का मतलब सिर्फ एक-दूसरे से दूर रहना नहीं है, बल्कि वैवाहिक संबंधों का पूरी तरह खत्म हो जाना है। जब तक एक वर्ष की यह शर्त पूरी नहीं होती, तब तक आपसी सहमति से तलाक की डिक्री नहीं दी जा सकती।

 

इस फैसले ने साफ कर दिया है कि शादी कोई मजाक नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और कानूनी बंधन है। इसे खत्म करने के लिए कानून की तय शर्तों का पालन जरूरी है। अब यह फैसला कई ऐसे मामलों के लिए मिसाल बनेगा, जहां जल्दबाजी में तलाक की मांग की जाती है।

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