भागलपुर, बिहार के एक युवा छात्र एमडी कुदरतुल्ला ने अपनी सूझबूझ, तकनीकी समझ और आत्मनिर्भर सोच से एक अनोखा नवाचार कर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। उन्होंने अपनी इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल को सोलर ऊर्जा से जोड़कर न सिर्फ अपनी समस्या का समाधान निकाला, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।

 

करीब एक साल पहले कुदरतुल्ला को एक इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल मिली थी। शुरुआत में यह उनके लिए काफी उपयोगी साबित हुई, लेकिन कुछ समय बाद बैटरी बैकअप की समस्या बड़ी परेशानी बन गई। बार-बार चार्जिंग की जरूरत, रास्ते में बैटरी खत्म हो जाने का डर और लगातार बढ़ता मरम्मत खर्च उनके लिए चुनौती बन गया था।

 

इसी समस्या से परेशान होकर उन्होंने इसका स्थायी समाधान खोजने का फैसला किया। अपनी तकनीकी समझ का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने ट्राइसाइकिल के ऊपर सोलर पैनल फिट कर दिया। यह पैनल धूप से ऊर्जा लेकर बैटरी को लगातार चार्ज करता है। खास बात यह है कि यह पैनल सिर्फ चार्जिंग का ही काम नहीं करता, बल्कि धूप और बारिश से बचाने के लिए छत का भी काम करता है।

 

इस पूरे बदलाव में उन्हें केवल 14 हजार रुपये का खर्च आया। उन्होंने सिस्टम में एक कंट्रोलर भी लगाया है, जो बैटरी को ओवरचार्जिंग से बचाता है और सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इससे बैटरी की उम्र भी बढ़ती है और गाड़ी की कार्यक्षमता बेहतर होती है।

 

कुदरतुल्ला का कहना है कि अब उनकी ट्राइसाइकिल दिनभर धूप से चार्ज होती रहती है। नई बैटरी के साथ यह रात के समय भी 70 से 80 किलोमीटर तक आराम से चल सकती है। इससे उन्हें बार-बार चार्जिंग की चिंता नहीं रहती और यात्रा भी आसान हो गई है।

 

उनका यह प्रयास आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। कम खर्च में बड़ा समाधान निकालकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच नई हो, तो हर समस्या का हल संभव है। उनका यह नवाचार आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक शानदार कदम माना जा रहा है।

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