पटना: बिहार में जुलाई के छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। सरकार ने पुलिस पर ‘अनुचित बल’ इस्तेमाल करने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए गए थे।
सीवान में AK-47 से फायरिंग के मामले में सरकार ने बताया कि भीड़ में फंसने के बाद एक कांस्टेबल ने हवा में चार गोलियां चलाई थीं। सरकार के मुताबिक, इन गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं लगी। कांस्टेबल को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि AK-47 प्लाटून स्तर का हथियार है और इसके इस्तेमाल को लेकर डीजीपी ने निर्देश जारी किए हैं।
वहीं, हाथी चौक के पास भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान एक ASI ने 9 एमएम पिस्टल से दो राउंड फायर किए। इसमें तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं। सरकार ने कहा कि इन तीनों को AK-47 की गोली नहीं लगी थी। घटना की बैलिस्टिक जांच अभी जारी है।
हलफनामे के अनुसार, 22 से 25 जुलाई के बीच बिहार में 69 FIR दर्ज हुईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बिना आपराधिक इतिहास वाले 222 छात्रों को जमानत पर रिहा किया गया, जबकि 75 किशोरों को किशोर न्याय बोर्ड के जरिए छोड़ा गया।
सरकार ने बताया कि गांधी मैदान, जहानाबाद, पटना, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज और सीवान समेत कई जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हुए। छपरा में पथराव और तोड़फोड़ के दौरान 2 BDO समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए। एक BDO की आंख में गंभीर चोट आई।
सरकार के मुताबिक, पूरे प्रदर्शन में 157 पुलिसकर्मी और सात सरकारी कर्मचारी घायल हुए। पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल भी स्वीकार किया है। सभी वीडियो फुटेज और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। मामले पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होगी।





