शिवहर जिले के पुरनिया प्रखंड के हथसार गांव की गीता देवी ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के दम पर गांव से भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। साल 2020 के लॉकडाउन में जब पूरा देश ठहर गया था, तब गीता देवी ने अपनी आर्थिक तंगी से लड़ने का फैसला किया। उनके पति पंजाब में फंसे थे और घर चलाना मुश्किल हो गया था। शुरुआत में उन्होंने दूध बेचकर और हाथ पंखा बनाकर गुजारा किया, लेकिन इससे परिवार की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही थीं।

इसी दौरान गीता देवी को एक नया विचार आया। वे पहले से ही जीविका समूह से जुड़ी थीं, जिससे उन्हें प्रशिक्षण और आत्मविश्वास मिला था। एक दिन उन्होंने अपने मामा की आइसक्रीम फैक्ट्री का वीडियो देखा और यहीं से उनके मन में आइसक्रीम बनाने का विचार आया। उन्होंने घर के आंगन से ही छोटे स्तर पर आइसक्रीम बनाना शुरू किया।

शुरुआत में कमाई 10 से 20 हजार रुपये तक थी, लेकिन धीरे-धीरे लोगों को उनका प्रोडक्ट पसंद आने लगा। उन्होंने अपने ब्रांड का नाम “सागर आइसक्रीम” रखा। आज उनके पास 18 वेंडर हैं और उनका सालाना कारोबार 30 से 35 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। उनके यहां वैनिला, बटर स्कॉच, मैंगो, एप्पल और स्ट्रॉबेरी जैसे कई फ्लेवर के आइसक्रीम बनाए जाते हैं, जो किफायती दामों पर उपलब्ध हैं।

गीता देवी की सफलता का सबसे बड़ा पहलू यह है कि उन्होंने 20 से 25 परिवारों को रोजगार दिया है। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें आईआईएम कोलकाता के इनोवेशन प्रोग्राम में सम्मानित भी किया गया। आज वे सरकार की “लखपति दीदी” योजना का हिस्सा हैं।

अब गीता देवी बड़ी फैक्ट्री लगाने की तैयारी में हैं, जिसके लिए उन्हें बैंक से लोन भी मिल चुका है। वे चाहती हैं कि गांव की और महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनें और आगे बढ़ें। उनकी कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो अपने दम पर कुछ बड़ा करना चाहती है।

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