सीतामढ़ी/जनकपुरधाम: तुलसी पीठाधीश्वर नेपाल के जनकपुरधाम पहुंचे, जहां उन्होंने मां जानकी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री को लेकर एक बड़ा बयान दिया, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
रामभद्राचार्य ने कहा कि नेपाल उनके लिए समधियाना है और यहां आकर उन्हें हमेशा खुशी होती है। उन्होंने नेपाल की समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनना चाहिए और किसी भी बाहरी ताकत, खासकर चीन पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
प्रधानमंत्री बालेन शाह के रवैये पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि उनका दृष्टिकोण भारत के प्रति सकारात्मक नहीं दिखता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बालेन शाह का रुख भारत विरोधी प्रतीत होता है, जो दोनों देशों के रिश्तों के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बालेन अभी युवा हैं और राजनीति में अनुभव की कमी है, इसलिए उन्हें भारत के साथ बेहतर संबंध बनाने चाहिए।
रामभद्राचार्य ने नेपाल में बढ़ते धर्मांतरण पर भी चिंता जताई और कहा कि हिंदुत्व के प्रति प्रेम में कमी दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि एक समय नेपाल में हिंदू राष्ट्र की दिशा में मजबूत माहौल बन रहा था, लेकिन वर्तमान नेतृत्व के कारण उस दिशा में बाधाएं उत्पन्न हुई हैं।
उन्होंने नेपाल की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि भारत और नेपाल का रिश्ता बहुत गहरा और ऐतिहासिक है। दोनों देशों को मिलकर एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व राजा बीरेंद्र बीर बिक्रम शाह देव के समय जैसा वातावरण फिर से बनना चाहिए।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में ग्रेटर नेपाल नक्शा, भारत से जाने वाले सामानों पर बढ़ी कस्टम ड्यूटी और अन्य मुद्दों को लेकर विवाद बढ़ा है, जिससे दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ता दिख रहा है।
