बिहार के मुंगेर जिले के तारापुर विधानसभा क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहां महाने नदी पर बना एक जर्जर पुल कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। यह पुल टेटिया बंबर प्रखंड के कटियारी पंचायत और संग्रामपुर के पतघाघर गांव को जोड़ता है और करीब दो दर्जन गांवों की जीवनरेखा बना हुआ है।
सबसे खतरनाक बात यह है कि पुल के 8 पिलरों में से 2 पिलर पूरी तरह हवा में झूल रहे हैं। नदी के तेज बहाव में इनके नीचे की मिट्टी बह चुकी है, जिससे पूरे पुल का संतुलन कमजोर हो गया है। ऊपर से देखने पर पुल सामान्य दिखता है, लेकिन नीचे का नजारा डराने वाला है।
इसके बावजूद रोजाना सैकड़ों वाहन और हजारों लोग इस पुल से गुजरने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार प्रशासन को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों के मुताबिक, पुल करीब 30 साल पुराना है और इसका कभी मेंटेनेंस नहीं हुआ।
स्थिति इतनी गंभीर है कि छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं। बारिश और बाढ़ के समय खतरा और बढ़ जाता है, जब पानी पुल के ऊपर से बहने लगता है। रेलिंग टूट चुकी है, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम कई गुना बढ़ गया है।
अगर यह पुल टूटता है तो पतघाघर, खपड़ा, जमुआ, सुपोल सहित दर्जनों गांवों का संपर्क टूट जाएगा और लोगों को 10 से 15 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ेगा।
हालांकि राहत की बात यह है कि प्रशासन ने नए पुल के निर्माण को मंजूरी दे दी है। 68.48 मीटर लंबा हाई लेवल आरसीसी पुल नाबार्ड योजना के तहत बनाया जाएगा, जिसका काम 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
फिलहाल सवाल यही है कि जब तक नया पुल नहीं बनता, तब तक क्या लोगों की जान यूं ही जोखिम में डाली जाती रहेगी?
