पटना: भारत और नेपाल के बीच दशकों पुराना ‘रोटी-बेटी’ का रिश्ता हमेशा से दोनों देशों की सांस्कृतिक और आर्थिक नजदीकियों का प्रतीक रहा है। लेकिन 15 अप्रैल 2026 से नेपाल सरकार द्वारा लागू किए गए नए कस्टम नियम ने इस रिश्ते में तनाव पैदा कर दिया है। नए प्रावधान के तहत भारत से नेपाल ले जाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर 5% से 80% तक कस्टम ड्यूटी अनिवार्य कर दी गई है।
इस फैसले का असर बिहार के सीमावर्ती इलाकों में साफ दिखने लगा है। सीतामढ़ी जिले के सोनबरसा प्रखंड स्थित इंदरवा बॉर्डर पर नेपाली सुरक्षाकर्मियों द्वारा भारतीय वाहनों को रोककर जब्त किए जाने की घटना से अचानक तनाव बढ़ गया। स्थानीय लोगों ने अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया, जिसके विरोध में भारतीय पक्ष के लोगों ने भी नेपाली वाहनों की आवाजाही रोक दी। हालात बिगड़ने पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो सकी।
व्यापारियों के अनुसार, इस नियम से उनका कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पहले जहां रोजाना हजारों रुपये का सामान नेपाल जाता था, अब हर वस्तु पर टैक्स लगने से लागत बढ़ गई है। उदाहरण के तौर पर, 1000 रुपये के सामान पर कस्टम ड्यूटी और वैट मिलाकर कीमत करीब 1300 रुपये तक पहुंच रही है, जिससे ग्राहक खरीदारी से पीछे हट रहे हैं।
मोतिहारी, रक्सौल और अररिया के जोगबनी जैसे सीमावर्ती बाजारों में सन्नाटा पसरने लगा है। व्यापारियों का कहना है कि नेपाल का यह कदम 1950 की भारत-नेपाल संधि की भावना के खिलाफ है, जिसमें खुला व्यापार और आवागमन सुनिश्चित किया गया था। उनका आरोप है कि यह एकतरफा फैसला है, जिससे छोटे व्यापारियों और मजदूरों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
नेपाल सरकार का तर्क है कि यह कदम स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने और राजस्व बढ़ाने के लिए उठाया गया है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अगर समाधान नहीं निकला, तो यह मुद्दा भारत-नेपाल संबंधों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
