बिहार लोकसेवा आयोग की सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पेपर लीक की अफवाहों के बीच जांच में साफ हुआ है कि प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था, बल्कि ‘मुन्ना भाई’ स्टाइल में फर्जी अभ्यर्थी बैठाने और कदाचार कराने की साजिश रची जा रही थी। इस मामले में नालंदा और मुंगेर जिलों में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार कर न्यायालय के हवाले कर दिया है, जबकि 18 अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार पुलिस मुख्यालय ने जांच आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को सौंप दी है और एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। आयोग ने भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है और सोशल मीडिया पर फैल रही पेपर लीक की खबरें भ्रामक हैं।
मुंगेर में 13 अप्रैल को ही पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 20 अभ्यर्थियों सहित 22 लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि एक संगठित गिरोह पैसे लेकर असली अभ्यर्थियों की जगह फर्जी उम्मीदवार बैठाने की तैयारी कर रहा था। इसके लिए बायोमेट्रिक सिस्टम से छेड़छाड़ की भी कोशिश की जा रही थी।
वहीं, 18 अप्रैल को नालंदा के बिहारशरीफ स्थित एक परीक्षा केंद्र से भी तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि बायोमेट्रिक कर्मियों ने प्रश्नपत्र का उत्तर तैयार कर अभ्यर्थी को उपलब्ध कराया था। परीक्षा के दौरान वीक्षक की सतर्कता से यह मामला पकड़ा गया। श्वेता कुमारी नामक अभ्यर्थी को आंसर शीट के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया, जिसके बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
सोहसराय थानाध्यक्ष मुकेश कुमार के अनुसार, गिरफ्तार दोनों बायोमेट्रिक कर्मियों ने मोटी रकम के बदले अभ्यर्थी को उत्तर उपलब्ध कराए थे। प्रारंभिक जांच में एक बड़े नेटवर्क के संकेत मिले हैं, जिसमें बाहरी एजेंसी द्वारा युवाओं को ट्रेनिंग देकर परीक्षा में पास कराने की योजना बनाई जा रही थी।
पुलिस को आरोपियों के पास से मोबाइल, टैब और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी मिले हैं। फिलहाल EOU पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और रोजाना प्रगति रिपोर्ट ली जा रही है।
