बिहार के बेतिया जिले से नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। पॉक्सो एक्ट के अनन्य विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार गुप्ता ने नामजद आरोपी साकीम अंसारी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह घटना 11 नवंबर 2024 की देर रात इनरवा थाना क्षेत्र के बरवा परसौनी गांव में हुई थी। पीड़िता अपने घर में सो रही थी और पानी पीने के लिए बाहर चापाकल पर गई थी। इसी दौरान आरोपी ने उसे जबरन पकड़ लिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची के शोर मचाने पर परिजन मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुका था। इसके बाद पीड़िता के पिता ने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि पीड़िता ने अदालत में मौखिक बयान नहीं दिया। इसके बावजूद पुलिस जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने केस को मजबूत बनाया। पुलिस ने डीएनए सैंपल पटना स्थित फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजा, जहां रिपोर्ट में आरोपी का डीएनए मैच कर गया। अदालत ने इस वैज्ञानिक साक्ष्य को अहम मानते हुए दोषसिद्धि का आधार बनाया।
विशेष लोक अभियोजक जयशंकर तिवारी ने बताया कि डीएनए रिपोर्ट और अनुसंधानकर्ता की भूमिका इस केस में निर्णायक रही। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सख्त सजा सुनाई।
अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत तीन लाख रुपये की सहायता राशि देने का भी आदेश दिया है।
यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में अहम है, बल्कि समाज में यह संदेश भी देता है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही, यह मामला यह भी दिखाता है कि आधुनिक तकनीक जैसे डीएनए जांच न्याय दिलाने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
