गया जिले के धनगाई थाना क्षेत्र के इमलिया टांड़ गांव का 14 वर्षीय करण कुमार अपने जज्बे और मेहनत से मिसाल बन गया है। दोनों हाथ गंवाने के बावजूद वह रोज साइकिल चलाकर स्कूल और ट्यूशन जाता है और पढ़-लिखकर बड़ा अधिकारी बनने का सपना देख रहा है।
करण जब करीब 8-9 साल का था, तब 11 हजार वोल्ट के बिजली तार की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया था। परिजन उसे इलाज के लिए अस्पताल ले गए। डॉक्टरों की कोशिश से उसकी जान तो बच गई, लेकिन संक्रमण फैलने के खतरे के कारण उसके दोनों हाथ काटने पड़े। इलाज में परिवार को लाखों रुपये का कर्ज भी लेना पड़ा।
हादसे के बाद करण काफी निराश हो गया था। ऐसे मुश्किल समय में उसकी मां सोनवा देवी ने उसका हौसला बढ़ाया और पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में उसने पैरों से लिखने का अभ्यास किया, फिर दोनों कटे हाथों के सहारे लिखना सीख लिया। अब वह खुद किताबों के पन्ने पलटता है, लिखता है और मोबाइल भी चलाता है।
करण नावाडीह हाई स्कूल में 10वीं कक्षा का छात्र है। वह रोज करीब तीन किलोमीटर दूर स्कूल साइकिल से जाता है और ट्यूशन के लिए भी साइकिल चलाकर पहुंचता है। उसकी दिनचर्या बेहद अनुशासित है। वह सुबह स्कूल जाता है, दोपहर में लौटने के बाद ट्यूशन पढ़ता है और शाम को भी पढ़ाई करता है।
करण का कहना है कि उसे हर हाल में पढ़ना है और IAS ऑफिसर बनना है। उसके पिता देव मांझी मजदूरी करते हैं, जबकि मां भी परिवार की आर्थिक मदद करती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद माता-पिता बेटे के सपने को पूरा करने में जुटे हैं।
करण की कहानी बताती है कि जिंदगी में मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, मजबूत हौसले, मेहनत और परिवार के सहयोग से आगे बढ़ने का रास्ता जरूर निकाला जा सकता है।





