बिहार में लागू शराबबंदी कानून को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की रिपोर्ट में शराबबंदी को 10 साल बाद भी प्रभावी नहीं बताते हुए कानून को खत्म करने की सिफारिश किए जाने के बाद जेडीयू ने कड़ा विरोध जताया है। पार्टी ने NCAER को लीगल नोटिस भेजने और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
जेडीयू के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता एवं विधान पार्षद नीरज कुमार ने गुरुवार को पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता कर रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी जल्द ही NCAER को कानूनी नोटिस भेजेगी। नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि सर्वे कराने वाली संस्था से जुड़े लोगों का यदि शराब कारोबार से जुड़े वित्तीय संस्थानों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध है, तो ऐसी रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
नीरज कुमार ने दावा किया कि NCAER की गवर्निंग बॉडी में एचडीएफसी बैंक के चेयरपर्सन दीपक एस. पारीख और आईटीसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संजीव पुरी भी जुड़े रहे हैं। जेडीयू ने आरोप लगाया कि रिपोर्ट शराब कारोबार से जुड़े हितों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
उन्होंने कहा कि बिहार को दोबारा शराब की कुरीति में धकेलने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। नीरज कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं की मांग और व्यापक सामाजिक हित को ध्यान में रखते हुए शराबबंदी लागू की थी। यह फैसला सर्वदलीय सहमति से लिया गया था।
जेडीयू नेता ने कहा कि शराबबंदी खत्म करने की बात करने वाले लोग ख्याली पुलाव बना रहे हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से शराबबंदी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने और नशे के खिलाफ लोगों को जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कुछ हजार करोड़ रुपये के राजस्व के लिए बिहार के भविष्य से समझौता नहीं किया जा सकता। बिहार में शराबबंदी खत्म नहीं होगी।





